यह देखकर अधिवक्ता आरती पांडेय व उनके साथ के अन्य लोग पहुंचे तो उनके साथ भी दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। जान से मारने की कोशिश और बाल पकड़कर खींचने का भी आरोप है। इस तहरीर पर देर रात पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। सोमवार को घटना की जानकारी मिलते ही जिले के अधिवक्ता उग्र हो गए। कचहरी परिसर में बैठक कर अधिवक्ता संघ ने घटना पर कड़ी नाराजगी जताई।
बैठक के बाद अधिवक्ता टोल कंपनी प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जुलूस लेकर बढ़ौली चौराहा पहुंचे। यहां कंपनी जमकर प्रदर्शन के बाद कंपनी प्रबंधन का पुतला फूंका। इसके बाद अधिवक्ताओं का समूह लोढ़ी पहुंचा और टोल बूथ के सामने बीच सड़क धरने पर बैठ गए।
इस दौरान अधिवक्ताओं ने जमकर नारेबाजी की। वह घटना के लिए दोषी टोल कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई, टोल प्रबंधन के शीर्ष अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, अधिवक्ताओं के लिए टोल शुल्क माफ करने की मांग कर रहे थे। वाराणसी, मिर्जापुर के अधिवक्ता भी आंदोलन में शामिल हुए। धरनास्थल पर सीओ सिटी रणधीर मिश्र, सीओ ओबरा अमित कुमार के नेतृत्व में भारी फोर्स डटी रही।
सीओ ने अधिवक्ताओं से वार्ता की। उन्हें आश्वस्त किया कि मामले में समुचित कार्रवाई की जा रही है। जो भी दोषी हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। टोल प्रबंधन की ओर से माफी मांगने व अन्य मांगों पर भी 24 घंटे में कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद अधिवक्ताओं का गुस्सा शांत हुआ।
बैठक, विरोध प्रदर्शन व धरने में सोनभद्र बार एसोसिएशन अशोक श्रीवास्तव, महामंत्री योगेश दुबे, शेष नारायण दीक्षित, प्रभाकर श्रीवास्तव, गोविंद मिश्र, आलोक सिंह, राघवेंद्र नारायण, विनोद शुक्ला, आशुतोष दुबे, शक्तिसेन, पवन मिश्र, राजीव सिंह गौतम, सूरज वर्मा आदि शामिल रहे।