अनपरा। बीएमएस ने 26 नवंबर को प्रस्तावित भारत बंद का समर्थन नहीं करने का निर्णय लिया है। संगठन का कहना है कि इस बंदी का कोयला से कोई संबंध नही है। कामर्शियल माइनिंग सहित कोयले से संबंधित अन्य मुद्दों पर कोयला श्रमिक पहले ही तीन दिवसीय हड़ताल कर चुके हैं। अब पुन: एक दिन की बंदी से नुकसान होगा। ये बातें बीएमएस के राष्ट्रीय कोयला प्रभारी के लक्ष्मा रेड्डी ने शुक्रवार को बीना स्थित बीएमएस कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
उन्होंने कहा कि एक दिन के भारत बंद से कोल कर्मचारियों का कोई लेना देना नहीं है। अलबत्ता इससे देश की कुछ राजनीतिक पार्टियों को जरूर फायदा होगा। उन्होंने एनसीएल में बढ़ती दुर्घटनाओं और संविदा श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा में व्याप्त खामियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे कोल मंत्रालय के संज्ञान में लाकर सुधार कराने की मांग की। कोल प्रभारी ने बताया कि कोल इंडिया की सभी कंपनियों का प्रवास कर कर्मचारियों की जमीनी स्तर की समस्याओं का आंकलन कर इसे सीआईएल एवं कोल मंत्रालय स्तर से निराकरण कर कर्मचारियों में व्याप्त निराशा को समाप्त करने का प्रयास करेंगे । उन्होंने कंपनी में दिन रात मेहनत कर विपरीत परिस्थितियों में कार्य कर उत्पादन लक्ष्य हासिल करने वाले कर्मचारियों का इसके लाभांश में भी हिस्सेदारी सुनिश्चित किये जाने की मांग की। कहा कि 22 नवम्बर एनसीएल के दोनों संगठनों की संयुक्त बैठक सिंगरौली में होगी। इस मौके पर मायाशंकर सिंह, अरुण कुमार दूबे, मुन्नीलाल, बेचूलाल, अशोक मिश्रा मौजूद रहे।