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अब गुलाबों से हम आ गए बबूलों तक...

Fri, 02 Jan 2015 11:09 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
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मधुरिमा साहित्य के बैनर तले गुरुवार की रात आरटीएस क्लब राबर्ट्सगंज में आयोजित 52वां अखिल भारतीय कवि सम्मेलन यादगार रहा। झमाझम बारिश, रूह कंपाने वाली ठंड में गीतों-गजलों की कशिश ने खूब तालियां बटोरी।
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 हास्य-व्यंग्य से भरपूर रचनाओं ने खूब ठहाके लगवाए। शायरों का भी अंदाज दिल को छू जाने वाला रहा। शुरूआत से लेकर अंत तक श्रोता जमे रहे।

बतौर मुख्य अतिथि डीएम दिनेश कुमार सिंह और विशिष्ट अतिथि एसपी शिवशंकर यादव ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की।

लगातार 52 वर्षों से आयोजित हो रहे कवि सम्मेलन को सोनभद्र का गौरव बताया। जगदीश पंथी ने श्वेत वसने मां कहा हो, आज फिर वीणा बजा दो.. के जरिए मां सरस्वती की वंदना की।
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अध्यक्षता कर रहे गजलों के सुप्रसिद्ध रचनाकार विकल साकेती ने गीत अब गुलाबों से आ गए बबूलों तक, जैसे हंस की कविता आ गई बगुलों तक.. के माध्यम से मानवीय मूल्यों में आ रही गिरावट पर चिंता जताई।

एएसपी शंभूशरण यादव ने हिंदुस्तान जल रहा है आतंक की आग से.., गाजीपुर के शायर अहमद आजमी ने बच्चों का कत्लेआम सरेआम कर दिया, बदनाम उसने मजहबे इस्लाम कर दिया.. के जरिए आतंकवाद पर प्रहार किया।

आजमगढ़ के वैभव वर्मा ने सबके दिलों में प्यार बसा हो, ऐसा हिंदुस्तान चाहिए, लखनऊ के डा. नरेश कात्यायन ने जब तक देश का एक जवान रहेगा,

तब तक दुनिया का हिंदुस्तान रहेगा.., जितेंद्र सिंह संजय ने देश क शीश हवइ कश्मीर, केहू कटवाइब कइसे.. रचनाओं के जरिए राष्ट्रभक्ति का जज्बा जगाया।

फिरोजाबाद से आए पूर्व सांसद प्रो. ओमपाल सिंह लीडर ने सौ करोड़ हिंदुओं को मारने की बात पर, सत्ता के वजीर जब मोह प्यादे हो गए, सड़कों पर सरेआम काटने वाले सिखों को, भोलेभाले सभी देखो सीधे-साधे हो गए..।

उन्होंने साध्वी के बयान पर देश तूफान मचने पर भी विरोधियों की चुटकी ली। साहित्य गोष्ठी के निदेशक अजयशेखर ने देवराज तुम अहिल्याओं का शीलभंग करते रहे वे पत्थर बनती रहेंगी,

तुम्हारा इंद्रासन सुरक्षित रहेगा और लंकाएं जलती रहेंगी.. से राजनीति की बिगड़ती स्थिति पर करारा प्रहार किया। वाराणसी की विभा सिंह ने तू ही मां बेटी बहू सृष्टि को समेटी हो, आज निर्मम जहां में हवस की रोटी हो.. से नारी उत्पीड़न का जिक्र किया।

संचालन कर रहे कमलेश मिश्र राजहंस ने हर ओर लुटेरे घूम रहे किसका-किसका इतिहास लिखूं.. से यथार्थ पर रोशनी डाली। ईश्वर विरागी, गाजीपुर   के व्यंग्यकार फजीहत गहमरी,  बीजपुर के दिनेश दिनकर, इलाहाबाद के शैलेंद्र   मधुर, राजबहादुर चक्री, अशोक तिवारी की रचनाएं जमकर  सराही गईं।
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