अवैध खनन पर रोक का जिले में कोई असर नहीं दिख रहा। हाईकोर्ट की सख्ती के बावजूद माफिया-अधिकारी गठजोड़ से बालू का अवैध खनन जारी है। सोन नदी के घोरावल स्थित कोलिया घाट के सेंचुरी एरिया कोरट और शिल्पी गांव से रोज दर्जनों ट्रैक्टर बालू खनन कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। प्रशासन, खनन, वन से लेकर पुलिस महकमा तक इसको लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
सोन नदी के किनारे कोलिया घाट से बालू का अवैध खनन जोरों पर हो रहा है। इसकी फिक्र न तो पुलिस प्रशासन को है और न ही वन विभाग के अफसरों को। घोरावल क्षेत्र में सोन नदी के आसपास के काफी भू-भाग समेत बहुत से स्थान वन क्षेत्र के रूप में घोषित एवं संरक्षित हैं।
क्षेत्रीय स्तर पर लगातार बिगड़ रहे पर्यावरण के मद्देनजर यहां मानवीय गतिविधियां प्रतिबंधित हैं, इसके बावजूद सोन नदी के कीमती बालू का खनन एवं वन क्षेत्र में परिवहन हो रहा है। गुरुवल मार्ग पर स्थित कोलियाघाट स्थित कोरट व शिल्पी गांव में सोन नदी के किनारे से लगातार हो रहे अवैध खनन, परिवहन पर न तो पुलिस प्रशासन की निगाह है और न वन विभाग की। यहां अवैध खनन कर बालू घोरावल, शाहगंज, करमा, राजगढ़, मड़िहान और अन्य क्षेत्रों मेें भेजा जाता है। शाम छह बजे से भोर में पांच बजे तक यह गोरखधंधा चलता है।