Sonbhadra News: सोनभद्र के गुरुद्वारे में धूमधाम से बैसाखी का पर्व मनाया गया। इस दौरान भक्तों का जमावड़ा रहा। दोपहर बाद अटूट लंगर की शुरुआत हुई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
सोनभद्र में बैसाखी का पर्व शनिवार को उत्साहपूर्वक मनाया गया। गुरुद्वारा को आकर्षक ढंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेका और अरदास की। रागी जत्थे के सबद कीर्तन से संगत निहाल हो गई।
विज्ञापन
जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल, वाहे गुरु जी दा खालसा, वाहे गुरु जी की फतेह के उद्घोष से क्षेत्र गुंजायमान रहा। तीन दिन से चल रहे अखंड पाठ का शनिवार की सुबह समापन हुआ। वीर सिंह और दया सिंह ने भजन गाया। कानपुर से परमजीत सिंह के नेतृत्व में आए जत्थे ने गुरुवाणी का पाठ व सबद-कीर्तन करते हुए गुरु के बताए मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया। जसबीर सिंह ने बैसाखी का महत्व बताया।
विज्ञापन
कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने समाज के दबे-कुचले और वर्षों से सताए जा रहे लोगों में जुल्म के खिलाफ शक्ति पैदा की थी। इसके लिए बैसाखी पर पूरे देश में संदेश भेजकर सिखों को आनंदपुर साहिब बुलवाया था। अंतिम परीक्षा के लिए भरे दीवान में पांच शीश की मांग की गई। इसके बाद ही धर्म की रक्षा और जाति-पाति के भेदभाव मिटाने के लिए पंच प्यारे की स्थापना हुई।
पुरुषों के नाम में सिंह और महिलाओं के नाम के आगे कौर लगाने की आज्ञा दी। उनके डर को समाप्त कर नया हौसला दिया। दोपहर बाद अटूट लंगर की शुरुआत हुई। इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम में रंजीत सिंह, देवेंद्र सिंह भंडारी, अजीत सिंह, मंजीत सिंह, मनमीत सिंह, परब्रह्म सिंह, सोनू भंडार, जसपाल सिंह, संतोष सिंह, चरनजीत सिंह, गोल्डी आदि मौजूद रहे।