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छूटे 1.63 लाख परिवारों का बनेगा आयुष्मान कार्ड

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सोनभद्र। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से वंचित जिले के करीब 1.63 लाख परिवारों में अभियान चलाकर आयुष्मान कार्ड बनाया जाएगा। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग आयुष्मान कार्ड बनाने में जुट गया है। लक्ष्य की पूर्ति के लिए बुधवार को विशेष आयुष्मान पखवाड़ा शुरू किया गया। 18 मई तक चलने वाले इस पखवाड़ा में वंचित पात्रों का आयुष्मान कार्ड बनाया जाएगा। जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कैंप आयोजित होगा ही, डोर टू डोर जाकर आशाएं आयुष्मान कार्ड बनाएंगी। इसके लिए उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। सीएमओ डॉ. आरएस ठाकुर ने बताया कि अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद की तरफ से जारी पत्र में निर्देशित किया गया है कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से आच्छादित आयुष्मान कार्ड विहीन लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए चार मई से 18 मई तक विशेष अभियान आयुष्मान पखवाड़ा चलेगा। बताया कि जिले में आयुष्मान भारत से 172583 परिवारों, मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से 9252 परिवारों को, 60558 अंत्योदय परिवारों एवं 9890 श्रमिक मजदूरों को चिन्हित किया गया है। कुल 250168 परिवारों को आच्छादित किया गया है। इसमें कुल 1083858 लाभार्थियों को जिले में इन दोनों योजनाओं से चिन्हित किया गया है, जिसमें अब तक कुल 20,18,140 लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बनाया गया है एवं 86,611 परिवारों का आयुष्मान कार्ड बनाकर कवर किया गया है। अभी 1,63, 557 परिवारों में आयुष्मान कार्ड नहीं बन सका है। आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए बुधवार से अभियान शुरू किया गया है। 18 मई तक आयुष्मान पखवाड़ा चलेगा। इस दौरान स्वास्थ्य केंद्र एवं सार्वजनिक स्थलों पर कैंप लगाकर तथा डोर टू डोर जाकर आयुष्मान कार्ड बनाया जाएगा। लाभार्थियों से शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक 9,655 लाभार्थियों का इलाज सफलता पूर्वक किया गया है। जिले में आठ राजकीय चिकित्सालय एवं 15 निजी चिकित्सालय योजना से सूचिबद्ध है। प्रत्येक चिकित्सालय में आरोग्य मित्र तैनात है जो लाभार्थियों का निशुल्क आयुष्मान कार्ड बनाते है एवं उनका प्री-ऑथराइजेशन (उपचार) कराने में सहायता करते है। करमा ब्लॉक के सिरसिया ठकुराई खैरपुर के रहने वाले गोविंद के 15 वर्षीय पुत्र सूरज का दाहिना हाथ थ्रेसर में काम करते समय बीते 28 अप्रैल को कट गया। सूरज को इलाज के लिये वाराणसी ले जाया गया। वहां के कई हॉस्पिटल ने इलाज करने से मना कर दिया। डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम मैनेजर जितेंद्र सिंह कुशवाहा के अनुसार सूरज को भर्ती करने के लिए कोई हॉस्पिटल तैयार नहीं था। उनसे बात की गई तो कहा गया कि हम इलाज नहीं कर सकते। इस बीच 50 हजार रुपये से अधिक की धनराशि खर्च भी हो चुकी थी। इसके बाद सूरज को इलाज के लिए वाराणसी के एक मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। जहां आयुष्मान भारत के अंतर्गत सूरज का इलाज चल रहा है।
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