निर्माणाधीन एडीटीसी का निरीक्षण करते एआरटीओ
सोनभद्र। राबर्ट्सगंज के छपका पावर हॉउस के पीछे ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक लगभग बनकर तैयार हो गया है। इस सेंटर पर वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा। निर्माणाधीन एडीटीसी का औचक निरीक्षण करने एआरटीओ व आरआई पहुंचे। यहां बन रहे सेंटर की गहनता से जांच कर संबंधित को निर्देश दिया। अधिकारियों ने मीडिया को बताया कि मार्च तक हर हाल में सेंटर तैयार करने का निर्देश प्रशिक्षण केंद्र के प्रोपाइटरों को दिया है। निरीक्षण रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
परिवहन आयुक्त के सख्त निर्देश के बाद विभाग पीपीपी मॉडल पर बने रहे एडीटीसी का कार्य तेजी से कराने में जुट गया है। परिवहन विभाग के एआरटीओ प्रशासन धनवीर यादव ने बताया कि राबर्ट्सगंज के छपका में दो एकड़ में ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक बन रहा है। यह सेंटर चालकों को ड्राइविंग का प्रशिक्षण देगा। उन्होंने बताया कि पूरे प्रदेश में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत ऐसे ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इससे परिवहन विभाग की तरफ से निजी संस्थाओं को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया है। सोनभद्र में तीन सेंटर का निर्माण हो रहा है। पहला सेंटर तेज सिंह का कार्य लगभग पूरा हो गया है। ट्रैक का कार्य पूरा हो गया है। मशीन व कैमरे लगने बाकी हैं। उम्मीद है इस वित्तीय वर्ष के समापन तक सेंटर बन कर तैयार है। मार्च तक संचालन करने का आदेश दिया गया है। सेंटर का उद्देश्य ड्राइविंग स्किल में सुधार करना है। यह पूरी तरह से आधुनिक व हाईटेक होगा। इसी निर्माणाधीन कार्य को देखने के लिए शुक्रवार को एआरटीओ धनवीर यादव व आरआई आलोक कुमार यादव पहुंचे। सोनभद्र में एआरटीओ के प्रयास से तीन सेंटर बन रहा है। इसमें दूसरा हिन्दुआरी के पास शिवा एडीटीसी और तीसरा संत कीनाराम स्कूल के पास ग्रामीण इंटरप्राइजेज एडीटीसी बन रहा है। इन सब सेंटरों को भी जल्द से जल्द कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
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सड़क सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
सोनभद्र। जनपद में ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल व टेस्टिंग ट्रैक न होने से परिवहन विभाग के अफसरों पर आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दूर दराज व ग्रामीण इलाकों से आने वाले लोग गाड़ी लेकर नहीं आ पाते है जिसके कारण उनको टेस्ट देने में असुविधा होती है। इन सेंटरों से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके चालकों से सड़क सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। जनपद में तीन-तीन ट्रेनिंग स्कूल बन जाने के बाद शिकायतों का दौर खत्म हो जाएगा और टेंड चालक से सड़क सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। ट्रैक बनने के बाद लोगों को ट्रेनिंग सेंटर में ही जाकर टेस्ट देना होगा।