जिले भर में शारदीय नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने मां के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा-अर्चना की। या देवी सर्व भूतेषु प्रकृति रुपेण संस्थिता, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम: मंत्रोचार के साथ सुबह से लेकर देर रात्रि तक देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से दर्शन-पूजन का दौर चलता रहा। व्रतियों ने कलश स्थापना के साथ दुर्गा शप्तशती का पाठ किया। इस दौरान देवी मंदिरों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे और सादे पोशाक में पुलिस की तैनाती रही।
मां शैलपुत्री के कई रूप हैं, जिसमें सती, पार्वती, पर्वतवासिनी, महेश्वरी, दुर्गा, उमा, अपर्णा, गौरी, शिवांगी, शुभांगी आदि नाम से जानी जाती हैं। मां जगदम्बा सती रूप में दक्ष प्रजापति की पुत्री बनी पर पिता के यहां यज्ञ में पति के अपमान से कुपित हो यज्ञागिभन में कूद पड़ी। सती का अगला जन्म शैलराज की पुत्री पार्वती के रूप में हुआ। घोर तपस्या के बाद भगवान शंकर ने उनका वरण किया। पर्वतराज की पुत्री होने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा।। राबर्ट्सगंज नगर के मेन चौक स्थित शीतला माता मंदिर, दंडइतर बाबा मंदिर परसर स्थित काली माता मंदिर, संतोषी माता मंदिर, सांई मंदिर के बगल में दुर्गरा मंदिरों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। सादे पोशाक में भी पुलिस की तैनाती रही।
्व्रतियो ने शुभ मुहूर्त में प्रात: 6:18 बजे से 7:30 बजे और उसके बाद पूर्वान्ह 11: 47 से दोपहर 12:35 बजे तक कलश की स्थापना की। इसके बाद कुछ लोगों ने स्वयं तो कुछ लोगों ने पुरोहितों से दुर्गा शप्तशती का पाठ कराया। चोपन और डाला प्रतिनिधि के मुताबिक- चोपन काली मंदिर और डाला वैष्णों देवी मंदिर पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां के दरबार में पूजन-अर्चन किया। इसी प्रकार से घोरावल, करमा, रामगढ़, खलियारी, वैनी, चुर्क, केकराही, शाहगंज, ओबरा, सलखन, दुृद्धी, विंढमगंज, महुली, म्योरपुर, बभनी, रेणुकूट क्षेत्रों में देवी मंदिरों पर पूजन-अर्चन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
ओबरा प्रतिनिधि के अनुसार नगर क्षेत्र में शनिवार को शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा सभी मंदिरों में पूरे विधि विधान व दैविक मंत्रोचार के साथ हुई। इस दौरान नगर के शारदा माता मंदिर, शीतला माता मंदिर, श्रीराम मंदिर, संकटमोचन मंदिर सेक्टर दो, करूणेश्वर महादेव मंदिर, गीता मंदिर, हनुमान मंदिर में सुबह से ही भक्त हाथों में नारियल, चुनरी, फल, धूप आदि पूजन सामग्री लेकर कतारबद्ध हो पूजन अर्चन में जुटे हुए थे। वहीं जगह जगह लोग कलष स्थापना भी करा रहे थे।