राज्य सेक्टर की सबसे बड़ी अनपरा परियोजना में पांच-पांच सौ मेगावाट की दो इकाइयां बंद तथा कोयले के गीलेपन के चलते पांच सौ मेगावाट की एक इकाई को आधी क्षमता पर चलाने से उत्पादन लड़खड़ा गया है। 210 मेगावाट वाली तीसरी इकाई अभी भी अनुरक्षण में पड़ी हुई है। इसके चलते 2630 मेेगावाट वाली परियोजना का उत्पादन जहां 1150 मेगावाट के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गया। वहीं सिस्टम कंट्रोल को जिला मुख्यालय समेत सूबे के कई हिस्सों में आपात कटौती का सहारा लेना पड़ा। एक-दो दिन में बंद पड़ी इकाइयों को उत्पादन पर आने की उम्मीद है।
कोयला संकट से जूझ रही अनपरा परियोजना की पांच सौ मेगावाट वाली छठवीं इकाई गत बुधवार को ब्वायलर ट्यूब लिकेज के चलते ट्रिप कर गई थी। इससे उत्पादन लुढ़ककर 18 सौ मेगावाट के इर्द-गिर्द आ गया।
गुरुवार की देर शाम तकनीकी दिक्कत के चलते पांच सौ मेगावाट की पांचवी इकाई भी ट्रिप हो गई। वहीं कोयले के गीलेपन के चलते पांच सौ मेगावाट की चौथी इकाई का लोड कम करना पड़ा। इसके चलते परियोजना का उत्पादन लुढ़ककर बारह सौ मेगावाट से भी नीचे आ गया।
समाचार दिए जाने तक अनपरा की 210 मेगावाट वाली पहली, दूसरी, पांच सौ मेगावाट वाली चौथी, सातवीं से कुल 1152 मेगावाट के करीब बिजली पैदा हो रही थी। वहीं राज्य सेक्टर की ओबरा में 321, पनकी में 90, पारीक्षा में 805, हरदुआगंज में 582 कुल 2950 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही थी। उधर, अनपरा सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि बंद पड़ी इकाइयां जल्द उत्पादन पर आ जाएं, इसके प्रयास जारी हैं।