कोयले के गीलेपन की वजह से अनपरा परियोजना में लड़खड़ाया बिजली उत्पादन गुरुवार की शाम तक सामान्य हो गया। इसके चलते बंद रखी गई 210 मेगावाट वाली दूसरी इकाई दोपहर बाद लाइटअप कर देर शाम तक उत्पादन पर ले ली गई। वहीं पहले से कई इकाइयों के बंद होने से मुश्किलों का सामना कर रही ओबरा परियोजना में 13वीं इकाई 15 दिन के लिए सामान्य अनुरक्षण पर ले ली गई। इससे यहां का उत्पादन लुढ़ककर 273 मेगावाट के करीब आ गया। हजार मेगावाट वाली अनपरा डी की दोनों इकाइयों के अनुरक्षण पर होने से इस परियोजना का उत्पादन शून्य बना रहा।
कोयले के गीलेपन के चलते सूबे की सबसे बड़ी परियोजना अनपरा को एक इकाई बंद करनी पड़ी थी। वहीं शेष इकाइयों से भी क्षमता से कम उत्पादन हो रहा था। इसके चलते परियोजना का उत्पादन लुढ़ककर हजार मेगावाट से भी नीचे चला गया था। गुरुवार को इसमें सुधार करते हुए 210 मेगावाट की पहली, तीसरी, पांच सौ मेगावाट की चौथी इकाई का उत्पादन सामान्य कर लिया गया। वहीं 210 मेगावाट वाली दूसरी इकाई को भी देर शाम तक उत्पादन पर ले लिया गया। इससे परियोजना का उत्पादन लगभग हजार मेगावाट से बढ़कर 14 सौ मेगावाट के करीब पहुंच गया।
अनपरा सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि कोयले की आपूर्ति ठीक आई, जिससे उत्पादन सामान्य हो गया है। अनपरा डी की पांच-पांच सौ मेगावाट वाली दोनों इकाइयां सामान्य अनुरक्षण पर हैं। इन्हें भी जल्द उत्पादन पर लाने की कोशिश है। उधर, ओबरा में 200 मेगावाट वाली तेरह इकाई 15 दिन के मिनी अनुरक्षण पर ले ली गई। इससे 471 मेगावाट चल रहा उत्पादन घटकर 271 मेगावाट हो गया। इसी क्षमता की 10वीं इकाई ब्वायलर में दिक्कत के चलते लंबे समय के लिए बंद हो गई है। अनुरक्षण में चल रही 11वीं इकाई को भी तीन-चार माह बाद उत्पादन पर आने की उम्मीद है। 50 मेगावाट की दूसरी इकाई भी बंद है। सिर्फ 50 मेगावाट की पहली, दो सौ मेगावाट की नौवीं, बारहवीं इकाई उत्पादन पर है। इसमें भी नवीं को वार्षिक अनुरक्षण पर लिया जाना है।