फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sonebhadra News: संग्रहालय के साथ दम तोड़ रही हैं प्राचीन धरोहरें

विज्ञापन
विज्ञापन
सोनभद्र। गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को सहेजने में संग्रहालय का अहम योगदान है। इनमें संरक्षित वस्तुओं से नई पीढ़ी को अपने अतीत के बारे में जानने और समझने में मदद मिलती है। कुछ ऐसी ही उम्मीदों के साथ जिले में दो राजकीय संग्रहालय स्थापित किए गए थे। इसमें सदियों पुराने पुरातात्विक धरोहरों और प्रस्तर कलाकृतियों को रखा गया था। देख-रेख के अभाव में यह संग्रहालय अब खुद संरक्षण की बाट जोह रहे हैं।
विज्ञापन

हाल यह है कि संग्रहालय में लंबे समय से कोई झांकने तक नहीं गया है। झाड़-झंखाड़ से पटे भवन खंडहर का रूप ले रहे हैं और उनमें संरक्षित की गई प्राचीन सभ्यता की अहम निशानियां भी धूल-धूसरित हो रही हैं। उपेक्षा का ऐसा ही आलम रहा तो जल्द ही संग्रहालय के साथ इन धरोहरों का अस्तित्व भी नष्ट हो जाएगा।
ढह गई बाहरी दीवारें, छत भी जर्जर
घोरावल। शिवद्वार क्षेत्र में बिखरी पड़ी मूर्तियों व प्रस्तर कलाकृतियों के संरक्षण के लिए आमडीह गांव में 14 वर्ष पूर्व बना राजकीय स्थलीय संग्रहालय बदहाल है। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने 18 जून 2005 को शिवद्वार मंदिर के ही समीप राजकीय स्थलीय संग्रहालय का शिलान्यास किया था, जिसका लोकार्पण मायावती सरकार में तत्कालीन संस्कृति मंत्री सुभाष पांडेय ने तीन सितंबर 2009 को किया।
विज्ञापन

यहां ऐतिहासिक महत्व की सै करीब 100 खंडित व अखंडित प्रतिमाएं व कलाकृतियां रखी गई हैं। इनमें शिव, दुर्गा, यक्ष, यक्षिणियों, तंत्र मंत्र से संबंधित धार्मिक चिह्न आदि शामिल हैं। मूर्तियों को देखने से स्पष्ट है कि सैकड़ों वर्ष पहले सोनभद्र जनपद का शिवद्वार क्षेत्र मूर्तिकला एवं शिल्पकला के क्षेत्र में समृद्ध रहा है। वर्तमान में यहां ताला बंद रहता है। संग्रहालय का भवन धूल खा रहा है। मुख्य गेट, चैनल व परिसर में झाड़ झंखाड़ उगे हुए हैं। संग्रहालय की दक्षिणी व पश्चिमी दीवार का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया है और शेष दीवारें भी गिरने की कगार पर हैं। रमाकांत दुबे, अजय गिरी, अमित मिश्रा, शिवप्रसाद बैसवार आदि ने बताया कि यह संग्रहालय शुभारंभ होने के बाद कुछ समय तक सही तरीके से संचालित हुआ, लेकिन इधर कई वर्षों से यह दुर्व्यवस्था का शिकार है। यहां पहले दो सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन इस समय यहां कोई नही आता।
बंद रहता है ताला, नहीं कोई रखवाला
रामगढ़। नगवां ब्लाॅक के मऊ कलां गांव में स्थलीय संग्रहालय का निर्माण लगभग दो दशक पूर्व उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय संस्कृति विभाग ने किया था। तिलिस्मी रहस्यों वाले विजयगढ़ किले के आसपास बिखरी प्राचीन मूर्तियों व कलाकृतियों को इसमें संरक्षित किया गया था। विडंबना है कि यह शोपीस बनकर रह गया है। यह स्थान धधरौल बांध और विजयगढ़ किला सहित तमाम पौराणिक स्थलों के बीच में है। बावजूद इसकी सुरक्षा और देखरेख पर किसी का ध्यान नहीं है। स्थानीय निवासी पूर्व जिला पंचायत सदस्य बबलू धांगर ने कहा कि कई वर्षों से यह संग्रहालय पर ताला लटकता रहता है। मऊ कलां के प्रधान बबलू मौर्या ने जनप्रतिनिधियों और उच्चाधिकारियों से मांग की है कि दुर्व्यवस्था के शिकार हो चुके इस संग्रहालय का मरम्मत करा कर यहां किसी की तैनाती की जाय, जिससे प्राचीन सभ्यता और संस्कृति को दर्शाने वाली धरोहरों को सुरक्षित रखा जा सके।
घोरावल और मऊ कलां के संग्रहालयों को पुर्नस्थापित करने की जरूरत है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर निदेशालय को भेजा गया है। वहां से मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू कराया जा रहा है। फिलहाल स्थानीय लोगों की मदद से देखभाल कराई जा रही है। - डॉ. सुभाष चंद्र यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें