जिले की सड़कों पर दौड़तीं कई एंबुलेंस में जरूरी मानक पूरे नहीं हैं। कहीं छोटे चारपहिया वाहनों को एंबुलेंस का रूप दिया गया। इनमें न तो प्राथमिक उपचार की सुविधाएं हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ।
एंबुलेंस लिखे होने के कारण इनकी कोई जांच भी नहीं करता। जिले में कितनी एंबुलेंस दौड़ रही हैं, इनका वास्तविक आंकड़ा न स्वास्थ्य विभाग के पास है और न ही परिवहन विभाग के पास।
स्वास्थ्य विभाग की 102 और 108 सेवा के अलावा जिले की सड़कों पर करीब डेढ़ सौ एंबुलेंस दौड़ रही हैं। जिले में संचालित अधिकांश निजी अस्पतालों की एंबुलेंस में मानक का पालन नहीं किया जा रहा है।
एंबुलेंस का कोई वाजिब किराया भी तय नहीं है। दस से बीस किमी तक जाने पर भी दो से ढाई हजार रुपये लिए जाते हैं।
मानक पूरे न होने पर पंजीकरण में नहीं दिखाई दिलचस्पी
पूर्व में सीएमओ कार्यालय की ओर से जिले में संचालित निजी एंबुलेंस चाहे वह अस्पतालों की हों या फिर स्वतंत्र रूप से संचालित हो रही हैं उन्हें पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गये थे। एंबुलेंस केवल चालकों के भरोसे संचालित होने और जरूरी संसाधनों के अभाव में अधिकांश एंबुलेंस पंजीकरण से दूरी बना ली। पूर्व में करीब दस एंबुलेंस सीज भी की गई थीं।
ये हैं मानक
एंबुलेंस में मरीज के लिए प्रारंभिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए। जरूरी दवाएं के साथ स्टेचर, स्टेथेस्कोप ट्रैक्शन डिवाइस, कार्डियक मॉनीटर, बीपी मॉनीटर, ऑक्सीजन सिलिंडर एंबुलेंस में होना चाहिए। रास्ते में मदद के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी भी साथ में होना जरूरी है। एंबुलेंस लिखे अधिकांश वाहन सिर्फ टैक्सी ही हैं। इसमें मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे ही होती है।
परिवहन विभाग में कई साल से डेढ़ सौ एंबुलेंस ही पंजीकृत
परिवहन विभाग के पास पंजीकृत निजी व सरकारी एंबुलेंस की संख्या करीब डेढ़ सौ है। इसमें करीब 80 से अधिक ऐसी एंबुलेंस भी हैं, जो अब प्रयोग से बाहर हो चुकी हैं। इस लिहाज से देखें सड़कों पर दौड़ रही 70 एंबुलेंस ही पंजीकृत हैं। हकीकत में यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा है। इनकी जांच लंबे समय से नहीं हुई है। इससे इतर जिले में वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर सहित अन्य जिलाें के नंबरों की एंबुलेंसों की भरमार है। निजी और मानक विहिन अस्पतालों या उससे कुछ दूर पर खड़ी रहने वाली एंबुलेंस की मदद से मरीजों को ढोया जा रहा है। मंगलवार को नगर के उरमौरा रोड पर मिर्जापुर नंबर की निजी एंबुलेंस मिली। उसे बोलेरो से एंबुलेंस में परिवर्तित किया। इसमें न तो प्रशिक्षित स्टॉफ था और न मेडिकल किट बाक्स और अग्निशमन यंत्र था।
निजी एंबुलेंस की जांच के लिए पूर्व में अभियान शुरू किया गया था। जिसमें पुलिस के सहयोग से कई एंबुलेंस को सीज किया गया है। आगे भी औचक जांच की जाएगी। नियम विरुद्ध संचालित एंबुलेंस पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।