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Sonebhadra News: रुपये के विवाद में नवजात को दो घंटे रोकने का आरोप

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दुद्धी। कस्बे के रामनगर स्थित एक निजी अस्पताल पर नवजात शिशु को बकाया राशि के विवाद में करीब दो घंटे तक रोककर रखने का आरोप लगा है। इस दौरान बच्चे की मां की हालत गंभीर होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया जा चुका था। परिजनों का आरोप है कि ग्राम प्रधान के हस्तक्षेप के बाद ही अस्पताल प्रबंधन ने नवजात को उनके सुपुर्द किया। फुलवार गांव निवासी कमलेश यादव ने बताया कि करीब एक सप्ताह पहले उनकी पत्नी चंदा ने म्योरपुर सीएचसी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। जन्म के बाद एक नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर उसे दुद्धी के रामनगर स्थित निजी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। भर्ती के समय अस्पताल में पांच हजार रुपये जमा कराए गए थे। कमलेश के अनुसार बुधवार को उनकी पत्नी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। अत्यधिक रक्तस्राव होने पर उसे सीएचसी दुद्धी ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। आरोप है कि जिला अस्पताल ले जाने से पहले जब वह निजी अस्पताल से नवजात को लेने पहुंचे तो अस्पताल प्रबंधन ने कथित तौर पर अतिरिक्त दो हजार रुपये जमा करने की मांग की और बच्चे को देने से इन्कार कर दिया। पीड़ित का कहना है कि पत्नी की गंभीर स्थिति बताने के बावजूद अस्पताल ने करीब डेढ़ से दो घंटे तक नवजात को नहीं सौंपा। बाद में फुलवार के ग्राम प्रधान दिनेश यादव के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को परिजनों के हवाले किया।
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