भारी बारिश के बीच बिजली का संकट भी गहरा गया है। बुधवार को तकनीकी खराबी (इलेक्टि्क जर्क) से ओबरा परियोजना की सभी इकाइयां बंद हो गईं। परियोजना का उत्पादन शून्य हो गया।
इससे पहले मार्च 2023 में परियोजना का उत्पादन शून्य हुआ था। तब कर्मचारियों की हड़ताल के कारण ऐसी नौबत आई थी। इस बार तकनीकी खराबी ने उत्पादन निगम को झटका दिया है। फिलहाल बिजली निगम के अभियंता खराबी को दूर करने में जुट गए हैं।
परियोजना सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार की दोपहर करीब ढाई बजे तेज आवाज के साथ 1320 मेगावाट क्षमता वाली ओबरा सी परियोजना की दोनों इकाइयां बंद हो गईं। अभियंता इकाइयों में आई तकनीकी खराबी को दूर करने के प्रयास में जुटे थे।
इस बीच शाम पांच बजकर 6 मिनट पर 1000 मेगावाट वाली ओबरा बी परियोजना की चालू 9वीं, 10वीं, 11वीं और 13वीं इकाई इलेक्ट्रिक जर्क के कारण ट्रिप हो गई। परियोजना की 12वीं इकाई पहले से ही बंद चल रही थी।
इकाइयों के बंद होने से परियोजना का बिजली उत्पादन शून्य हो गया। इकाइयों के बंद होते ही अभियंता इकाइयों में आई तकनीकी खराबी को दूर कर लाइटअप करने के प्रयास में जुट गए।
अभियंताओं ने शाम 6:13 बजे 200 मेगावाट क्षमता वाली ओबरा बी परियोजना की 13वीं और 6:18 बजे 11वीं इकाई को लाइटअप करने में सफलता हासिल कर ली थी। इन इकाइयों से देर रात तक बिजली उत्पादन शुरू हो गया।
वहीं अन्य इकाइयों को लाइटअप किए जाने का प्रयास जारी था। उधर, 200 मेगावाट क्षमता वाली 12वीं इकाई को सिंक्रोनाइज करने के समय इकाई के 400 केवी का ब्रेकर डैमेज हो गया जिससे इकाई चालू नहीं की जा सकी।
अप्रैल 2020 में भी शून्य हुआ था उत्पादन
इससे पहले 22 अप्रैल 2020 को ओबरा तापीय परियोजना के करंट ट्रांसफार्मर (सीटी) में ब्लास्ट के कारण आइसीटी (इंटर कनेक्टिंग ट्रांसफार्मर) में आग लग गई थी। इससे बी-परियोजना की उत्पादनरत 200 मेगावाट की चार इकाइयां बंद हो गईं। इस कारण नौ पारेषण लाइनें ठप हो गईं, जिससे प्रयागराज, वाराणसी, सोनभद्र, मिर्जापुर सहित कई जिलों में अघोषित विद्युत कटौती करनी पड़ी। वहीं 18 मार्च 2023 को बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के चलते एक हजार मेगावाट क्षमता वाली ओबरा परियोजना से उत्पादन शून्य हो गया था।