नगवां ब्लॉक के वैनी सीएचसी पर बुधवार की शाम उस समय हड़कंप मच गया जब नसबंदी के बाद महिलाओं को जमीन पर लेटा दिया गया। इतना ही नहीं जनरेटर होने के बाद भी प्रकाश का प्रबंध नहीं किया गया, इसकी वजह से मरीज और साथी अंधेरे में तड़पते रहे।
इसकी शिकायत रात्रि में डीएम और सीएमओ से लोगों ने दूरभाष पर की। बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हुआ और सारी रात जमीन पर ही अंधेरे में लोगों को गुजारना पड़ा।
नक्सल प्रभावित नगवां ब्लॉक क्षेत्र की महिलाओं के लिए नसबंदी कैंप वैनी सीएचसी पर लगा था। यहां पर दूर-दराज के गांवों से भारी संख्या में महिलाएं अपने साथियों के साथ नसबंदी कराने आई थीं। नसबंदी के बाद महिलाओं को अस्पताल में जमीन पर ही लेटा दिया गया।
रात्रि आठ बजे तक सभी लोगों को अंधेरे में ही रहना पड़ा, जबकि सीएचसी में जनरेटर की सुविधा है। इतना ही नहीं विशेष नसबंदी कैंप लगा था यहां पर तो प्रकाश की व्यवस्था निहायत जरूरी थी, बावजूद इसके किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया।
ठंड के मौसम में कोई बेड और कंबल आदि न दिए जाने की वजह से लोग ठिठुरते रहे और बहुत सी महिलाओं को उल्टी भी होने लगी। लेकिन उनकी सुधि लेने के लिए कोई नर्स, डॉक्टर, एएनएम नहीं आई। अंधेरे में मोमबत्ती की रोशनी में बिलबिलाए लोग अस्तपाल के बाहर आकर शोरगुल शुरू कर दिया।
आसपास के लोग जब वहां पहुंचे और वाकये की जानकारी की तो संबंधित डॉक्टर से बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन मोबाइल स्वीच ऑफ रहा। इसके बाद डीएम जीएस प्रियदर्शी और सीएमओ डॉ. यूके वर्मा से मोबाइल पर लोगों ने वाकये की जानकारी दी।
अधिकारियों ने जांच कराकर संबंधितों के विरूद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस मौके पर फूलवंती, भगवंती, मंगरी, सुभवंती, शकुंतली, मुटुरी, शनिचरी, शान्ति, अर्शकली, कबुतरी, चंद्रावती, निशा आदि ने विरोध जताया।