अध्यापकों के तबादले में मनमानी की जांच में बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात वरिष्ठ सहायक (लिपिक) राजेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। संयुक्त शिक्षा निदेशक विंध्याचल मंडल माया निरंजन की कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मचा है। लिपिक को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान से संबद्ध कर दिया गया है। साथ ही डायट के पदेन प्राचार्य को जांच अधिकारी नामित किया गया है। राजेश पर अध्यापकों के तबादले में मनमानी का आरोप है। इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा है। और भी कर्मचारी इसमें फंस सकते हैं।
करीब एक माह पूर्व जिले में शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया चल रही थी।
इस तबादले में तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी और बीएसए कार्यालय का वरिष्ठ सहायक राजेश कुमार के खिलाफ किसी ने डीएम से शिकायत की कि शिक्षकों के तबादले में इन दोनों की ओर से मनमानी की जा रही है।डीएम सीबी सिंह ने जब अपने स्तर से मामले की जांच कराई तो मामला सही पाए जाने पर उन्होंने राजेश कुमार को तत्काल कलेक्ट्रेट से संबद्घ कर दिया था और तत्कालीन बीएसए मनभरन राम राजभर के खिलाफ शासन को पत्र लिखा था। बाद में राजभर का यहां से तबादला हो गया। इसके बाद डीएम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ लिपिक राजेश के निलंबन का पत्र संयुक्त शिक्षा निदेशक को लिखा था।
इस पर जांच कराने के बाद जेडी ने 15 अक्टूबर को राजेश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। जेडी के पत्र में कहा गया है कि अध्यापकों के अनियमित तबादले और समायोजन में डीएम कार्यालय में संबद्घ होने के बावजूद वरिष्ठ सहायक ने बीएसए कार्यालय में जाकर 13 अध्यापकों के स्थानांतरण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। जो उनकी स्वेच्छाचारिता और डीएम के निर्देशों की अवहेलना है। इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान राबर्ट्सगंज सोनभद्र से संबद्घ किया जाता है। इस पूरे प्रकरण की जांच डायट के पदेन प्राचार्य को दी गई है। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप है। बता दें कि पूर्व में नौकरी दिलाने के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप में बीएसए के सर्व शिक्षा अभियान कार्यालय से संबद्घ लिपिक को गिरफ्तार किया जा चुका है।