लाखों रुपये लेकर फरार चिटफंड कंपनी के खिलाफ निवेशकों ने शुक्रवार को थाने पहुंचकर आवाज उठाई। कंपनी के कर्ताधर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए तहरीर दी और घंटों थाने पर ही डेरा डाले रहे। पुलिस ने एक-दो दिन में कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया, तब जाकर निवेशक वहां से हटे।
डिबुलगंज निवासी विजयनारायण, लालजी, प्रमोद श्रीवास्तव, लालजी प्रसाद कुशवाहा, गोपाल मंडल आदि का कहना था कि मेसर्स रीयल रेलसस बेनीफिट कंपनी लिमिटेड के नाम से अनपरा स्थित एक जेई की पत्नी ने
वर्ष 2009 में चिटफंड कंपनी खोली और उसका प्रधान कार्यालय डिबुलगंज में स्थापित कर अपने एजेंटों के जरिए लाखों रुपये की रकम विस्थापितों से जमा कराई। इनके लुभावने सपने के झांसे में आकर काफी संख्या में लोगों ने लाखों की रकम जमा कर दी।
विष्णु दयाल, पंकज कुमार, समयलाल कुशवाहा, श्ंाभू पाल, वीरेंद्र कुमार आदि का कहना था इसको लेकर ढाई माह पहले थाने में गुहार लगाई गई तो कंपनी के कर्ताधर्ताओं ने दो माह में जमा रकम वापस लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन रकम नहीं मिली।
तब गत 14 जून को दर्जनों निवेशक थाने धमक पड़े और कार्रवाई की मांग करते हुए थाने में ही डेरा डाल दिया और प्रदर्शन भी किया। हालात को देखते हुए पुलिस ने कंपनी के कर्ताधर्ताओं को तलब किया।
समझौता हुआ कि तीन जुलाई तक निवेशकों की रकम चुकता कर दी जाएगी, लेकिन जब रकम अदा करने की बारी आई तो संबंधित अनपरा से गायब हो गए।
रवींद्र कुशवाहा, रामलल्लू, रामसुगन, धर्मेंद्र गुप्ता, अयोध्या कुमार सिंह का कहना था कि मजबूरन फिर से पुलिस के यहां पहुंचना पड़ा। बताया गया कि समझौते में यह भी बात तय हुई थी कि अगर तीन जुलाई को रकम वापस नहीं होती है तो संबंधितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी लेकिन पुलिस अब तक कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है। उधर, दरोगा डीपी सिंह का कहना था कि रकम वापस कराए जाने का प्रयास जारी है।