सोनभद्र। चिटफंड कंपनी का शाखा प्रबंधक रहने के दौरान अपनी ही कंपनी के कैशियर से साढ़े पांच लाख रुपये उधार लेकर अदा न करने के मामले में अपर मुख्य न्यायिक अधिकारी राहुल की अदालत ने राकेश कुमार रावत दोषी करार दिया। कोर्ट ने शनिवार को उसे छह महीने कारावास और साढ़े सात लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
करीब सात साल पहले एवर ग्रीन मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड में बबुरी निवासी राकेश कुमार रावत शाखा प्रबंधक के रूप में काम करता था। ओबरा की रहने वाली सुनीता यादव उसी ब्रांच में कैशियर थी। सुनीता ने राकेश को साढ़े पांच लाख रुपये उधार दिए थे। आरोप है कि उसने एक साल में रुपये वापस करने का वादा किया था। इसके बाद 10 मार्च 2018 को राकेश ने एक लाख रुपये के पांच और 50 हजार का एक चेक सुनीता को दिया। पीड़िता का आरोप था कि जब उसने बैंक में चेक जमा किया तो 17 मार्च को यह कहते हुए चेक वापस कर दिए गए कि संबंधित खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं है। इसकी जानकारी देने के बाद भी आरोपी ने रुपये वापस नहीं लौटाए तो उसने 24 अप्रैल 2018 को एसीजेएम की अदालत में परिवाद दाखिल किया था। करीब सात साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने राकेश कुमार रावत को छह महीने कैद और साढ़े सात लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।