सोनभद्र। किसी भी बड़ी आपराधिक वारदात का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डॉग स्क्वायड जिले में नहीं हैं। इससे कोई भी वारदात का खुलासा होने में खासी परेशानी पुलिस को झेलनी पड़ रही है। पुलिस को गैर जिलों से इसके लिए मदद लेनी पड़ती है।
चार प्रांतों बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा से सटे सोनभद्र में यूं तो नक्सलवाद होने के साथ ही अन्य आपराधिक वारदातें भी समय- समय पर होती रहती हैं। बहुतेरे मामलों का पुलिस गहन छानबीन कर जल्द खुलासा भी कर देती है लेकिन तमाम ऐसी वारदातें हैं जो अब भी पुलिस के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। इसकी एक वजह जिले में डॉग स्क्वायड का न होना भी है। आम तौर पर बड़ी चोरियों से लेकर जघन्य हत्या तक के मामले में पुलिस डॉग स्क्वायड का प्रयोग सुरागरसी के लिए करती है। कुछ अलग किस्म के डाग घटना स्थल पर पहुंच कर घटना अपनी क्षमतानुसार मामले की जांच करते हैं और इस बात की ओर इशारा करते हैं कि घटनाओं को अंजाम देने वाला कितनी दूर तक जा सकता है। घटनाओं का जल्द खुलासा भी होता है लेकिन जिले में डॉग स्क्वायड न होने से पुलिसकर्मियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सुकृत में गोली मार कर हुई हत्या, बभनी क्षेत्र में हत्या समेत तमाम मामले हैं जिनमें डॉग स्क्वायड की मदद मिल सकती थी।
ली जाती तो अब तक मामलों का खुलासा हो गया होता।