महुली। दुद्धी इलाके में जीवनदायिनी नदियों का अस्तित्व संकट में है। लगातार हो रहे अवैध खनन से नदियां गहरी होती जा रही हैं। तटीय इलाकों में नदियों पर निर्भर रहने वाली जनजातियां नदियों की दुर्दशा देख कर व्यथित हैं। क्षेत्र के कनहर, ठेमा, लौवा, मलिया, पांगन सहित आधा दर्जन नदियां अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही हैं। खनन माफिया नदियों से बालू का अवैध खनन कर रहे हैं। विशेष खासियत रखने वाला कनहर का बालू अवैध तरीके से कई महीनों से निकाला जा रहा है। प्रशासन से सांठ-गांठ की वजह से बालू माफियाओं के विरुद्ध कार्रवाई नही हो रही है। कालींजर, बघाडू, भिसुर, नगवां, हीराचक, पतरिहा, कोरगी, पीपरडीह, जोरकहू, बासिन जैसे दर्जनों आदिवासी बाहुल्य गांवों के रहवासियों ने बताया कि लगातार हो रहे बालू खनन और पत्थरों के तुड़ान से नदियां काफी गहरी हो गई हैं। अवैध खनन अगर इसी तरह होता रहा तो नदियों पर आश्रित रहने वाली जनजातियों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा। भगवानदास, जगजीवन, रामपति, सुदर्शन गोड ने बताया कि बालू के अवैध खनन से नदी के ऊपरी क्षेत्र में मिट्टी के टीले और पत्थर दिखने लगे हैं। इस बारे में पूछने पर डीएफओ आशीष तिवारी ने आवश्यक मीटिंग में शामिल होने की बात कहकर फोन काट दिया। वहीं विंढमगंज रेंजर बीके मणी त्रिपाठी ने कहा कि अवैध खनन की शिकायत पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने रेंज में अवैध खनन होने से इंकार किया है।