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नकली और असली बीज के बीच फंसे किसान

Sun, 22 Jul 2012 12:00 PM IST
Sonbhadra
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केकराही। जनपद में टमाटर की खेती करने वाले किसान नकली और असली बीज को लेकर ऊहापोह की स्थिति में है। उनको यह समझ में नहीं आ रहा है कि कौन सा बीज अच्छा और कौन सा खराब है। पिछले वर्ष बाढ़ से बर्बाद हुए किसानों द्वारा पहले से ही फूंक-फूंक कर कदम आगे बढ़ाया जा रहा है।
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जनपद में केकराही, करमा, भटौलिया, बकाही, करकी माइनर, बहुअरा, मधुपुर टमाटर का हब माना जाता है। यहां पिछले वर्ष आई बाढ़ ने जहां किसानों की कमर तोड़ कर रख दी थी। वहीं, इस बार फिर बाढ़ का कहर किसानों को बर्बाद न कर दे इससे वे पूरी तरह से सहमे हुए हैं। किसानों का कहना है कि पहले तो दुकानदार भी हमारी मदद करते थे। बीज महंगा होने के कारण किसानों से कुछ पैसा लेकर और कुछ बाद में लेने की बात कह कर दुकानदारों द्वारा बीज एवं दवाएं दी जाती थी, लेकिन किसानों द्वारा खेती घटा दिए जाने से दुकानदार भी डर से गए हैं। अब किसानों को पूरा पैसा देने पर ही बीज मिल रहा है, ताकि कहीं से उनका पैसा ब्लाक न हो सके। पिछली बार आई बाढ़ के कहर से तबाह हुए कुछ किसानों द्वारा दुकानदारों का पैसा न दिए जाने की वजह से वह किसी भी किसान को उधार बीज देने से मना कर रहे हैं। इससे किसानों की समस्याएं बढ़ गई। किसान महंगे बीजों को खरीदने में भी अब डरने लगे हैं। पैसा उतना ही लगना है चाहे दुकानदार द्वारा नकली बीज या फिर अच्छे किस्म के बीज दिया जाय। यदि बीज असली होगा तो पैदावार भी अच्छा होगा। असली बीज की जगह नकली बीज दुकानदारों द्वारा दे दिया गया तो किसानों का सारा पैसा बर्बाद हो जाएगा। इससे किसानों को घाटा लगने का भय फिर से सताने लगा हैं। इससे सहमे किसान बीज खरीदने से भी हिचकने लगे हैं। किसान निद्धनाथ, पप्पू, श्याम नारायण, चंद्रकांत का कहना है कि बीज की क्वालिटी समझ में नहीं आ रही है। कोई दुकानदार गारंटी देने को तैयार नहीं है।
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