अनपरा। अभी तक म्योरपुर, दुद्धी और कोन इलाके में विकलांगता का कारण बने फ्लोरोसिस ने ऊर्जांचल में भी अपनी जड़ें जमा ली हैं। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य अरविंद कुमार के निर्देश पर अनपरा और आसपास के गांवों में तीन दिन तक चली जांच में फ्लोरोसिस प्रभावितों की बड़ी संख्या मिली है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजने के साथ ही 25 से अधिक जगहों से पानी का नमूना उठा कर लैब परीक्षण के लिए लखनऊ भेज दिया गया है। डिबुलगंज स्थित संयुक्त चिकित्सालय के जरिए प्रभावितों के की कोशिश शुरू की गई है।
बताते चलें कि चोपन, म्योरपुर, दुद्धी और बभनी ब्लाक के 22 गांवों में 15 वर्ष से फ्लोरोसिस का प्रकोप है। अन्य गांवों में भी फ्लोरोसिस का प्रकोप गहराने की बात सामने आती रहती है। पिछले माह इसकी जानकारी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तक पहुंची तो उन्होंने प्रमुख सचिव को म्योरपुर और चोपन ब्लाक क्षेत्र की स्थिति का विस्तृत सर्वे कराने का निर्देश दिया। उनके निर्देश पर एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) से जुड़ी टीएसयू (टेकिभनकल सपोर्ट यूनिट) की टीम ने 12 से 16 नवंबर तक दोनों ब्लाकों (ऊर्जांचल शामिल) का दौरा कर स्थिति की जानकारी शासन को दी। 17 से 19 नवंबर तक डबुलगंज संयुक्त चिकित्सालय के प्रभारी डा. बीके सिंह को साथ लेकर जिला स्तरीय टीम ने अनपरा क्षेत्र में फ्लोरोसिस की स्थिति की जानकारी की। दस से अधिक गांवों की जांच हुई। इसमें परासी, औड़ी गांव के कहुआनाला और बेलवादह में फ्लोरोसिस प्रभावितों की संख्या काफी ज्यादा मिली। पश्चिमी परासी स्थित प्राथमिक स्कूल में कई छात्र-छात्राएं दंत फ्लोरोसिस से पीड़ित मिलीं। बेलवादह में हंसलाल (60) और कहुआनाला में राममिलन (20) सहित कई में कंकालीय फ्लोरोसिस का प्रकोप देखने को मिला। इसे देखते हुए इन गांवों में स्थित जल स्रोतों के 25 से अधिक नमूने लैब परीक्षण के लिए ले जाए गए। डा. बीके सिंह ने बताया कि स्थिति को देखते हुए संयुक्त चिकित्सालय स्तर से प्रभावितों को हर संभव उपचार मुहैया कराने का काम शुरू कर दिया गया है।
सीएमओ डा. अमरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि अनपरा से सटे डिबुलगंज में स्थित अस्पताल में इसके लिए अलग से उपचार केंद्र की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक सप्ताह चिकित्सकों की टीम भी फ्लोरोसिस प्रभावित इलाके का दौरा करेगी, जिसमें एक दंत चिकित्सक, एक मेडिकल अफसर और एक एनएनएम शामिल रहेगी।