अनपरा। कोयला खदानों एवं ब्लाकों का निजी क्षेत्र में आवंटन सुप्रीम कोर्ट से रद्द होने के बाद केंद्र सरकार की ओर से नए सिरे से अपनाई जा रही आवंटन प्रक्रिया की ट्रेड यूनियनों ने मुखालफत शुरू कर दी है। गुरुवार को अनपरा परियोजना के आवासीय कालोनी परिसर स्थित मनोरंजन केंद्र में पांचों प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त रूप से सम्मेलन कर आवाज उठाई। केंद्र सरकार को कारपोरेट नीतियों का पोषक बताते हुए कोयला ब्लाकों का संचालन सार्वजनिक क्षेत्र में कराए जाने की मांग की। ऐलान किया कि किसी भी हाल में निजी क्षेत्र में आवंटन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस दौरान 24 नवंबर से शुरू होने वाली हड़ताल को ऐतिहासिक बनाने का दावा करते हुए आरपार के संघर्ष का ऐलान भी किया गया।
सीटू के प्रांतीय महासचिव प्रेमनाथ राय, एटक के जिलाध्यक्ष लल्लन राय ने कहा कि पूरे देश में निजी क्षेत्र में जनता के शोषण और लूट-खसोट में लगे हुआ है। पूर्ववर्ती सरकार ने उदारीकरण के नाम पर कोल ब्लाकों को निजी क्षेत्र में आवंटित कर इसकी अनदेखी की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जनहित में सराहनीय कदम उठाते हुए करार रद्द कर दिया। सीटू के प्रांतीय सचिव आरएस शर्मा, जिलाध्यक्ष अवधराज सिंह ने कहा कि निजी क्षेत्र को खुले बाजार में कोयला बिक्री का अधिकार मिलने से जनहित का नुकसान तो होगा ही, देशहित को भी इससे भारी क्षति पहुंचेगी। एटक के महामंत्री अशोक दुबे, एचएसएस के क्षेत्रीय मंत्री अशोक पांडेय, इंटक के जिलाध्यक्ष हरेंद्र पांडेय ने कहा कि सभी जानते हैं कि कारपोरेट जगत पहले अपना स्वार्थ देखता है। कोल फील्ड लेबर यूनियन सिंगरौली के महासचिव पीएस पांडेय, जनवादी नौजवान सभा के जिलाध्यक्ष गुड्डू उपाध्याय ने भी कोल ब्लाकों का संचालन सार्वजनिक क्षेेत्र में करने की मांग की। कहा कि इसको लेकर 24 नवंबर से आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। संचालन उप्र इंप्लाइज यूनियन के प्रांतीय महासचिव विशंभर सिंह ने किया।