अनपरा/शक्तिनगर। जनपद के प्रदूषित गांवों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति का पूर्व में दिए गए निर्देश को लेकर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। निर्देश पर कितना अमल हुआ, जिन चयनित गांवों में आरओ प्लांट अब तक नहीं लग पाया, उसका कारण क्या है, इन सारी चीजों के साथ क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी सोनभद्र कालिका सिंह को 15 अक्टूबर को दिल्ली स्थित मुख्य बेंच में तलब किया गया है। आरओ प्लांट की स्थापना पर अब तक कितना व्यय किया गया और आगे कितना व्यय होना है, इसकी भी जानकारी मांगी गई है।
सिंगरौली निवासी एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्वनी दूबे ने जनपद एवं सिंगरौली के प्रदूषण प्रभावित इलाकों को स्वच्छ पेयजल एवं अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की मांग को लेकर एनजीटी में याचिका दाखिल कर रखी है। चार माह पूर्व इस मामले में प्रदूषित प्रभावित गांवों में आरओ प्लांट लगाकर पेयजलापूर्ति का निर्देश दिया गया था, लेकिन कई गांव ऐसे रह गए हैं, जहां अब भी टैंकर के जरिए ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसके पीछे संबंधित परियोजना प्रबंधनों का तर्क है कि आबादी बिखरी होने के कारण आरओ प्लांट लग पाना संभव नहीं हो रहा है। ऐसे 13 चयनित स्थलों पर आरओ प्लांट अब तक नहीं लग पाया है। इसी प्रकरण को लेकर सोमवार को एनजीटी के दिल्ली स्थित मुख्य बेंच में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद चेयरपर्सन स्वतंत्र कुमार ने कई जगहों पर आरओ प्लांट न लग पाने को गंभीरता से लेते हुए जनपद के क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी को तलब कर लिया। उन्हें जरूरी जानकारियों के साथ 15 अक्टूबर को उपस्थित रहने को कहा गया है। इस दिन प्रकरण की सुनवाई के लिए तिथि भी मुकर्रर की गई है।