ओबरा (संवाददाता)। संयोग ही था कि जिस वक्त हादसा हुआ उस वक्त एक ट्रेन खड़ी थी। वहीं पीछे से आने वाली ट्रेन की रफ्तार धीमी थी वरना बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता था। दिलचस्प बात यह है कि यहां का सिगभनल अक्सर खराब ही रहता है लेकिन इसको लेकर संजीदगी न दिखाने का परिणाम आखिरकार हादसे के रूप में सामने आ ही गया।
ओबरा डैम रेलवे स्टेशन पर कबाड़चोरों की ओर से केबल काट दिए जाने से अक्सर सिग्नल की समस्या आ जाती थी। कई बार रेलवे स्टेशन स्तर से इसको लेकर अधिकारियों को सूचना दी जा चुकी थी लेकिन महज सिगभनल ठीक कर समस्या के प्रभावी निदान के मसले पर चुप्पी साध ली जाती थी। यहां तैनात आरपीएफ जवानों की ओर से केबल चोरों पर शिकंजा कसने में सक्रियता नहीं दिखाई गई। इसके चलते सिग्नल में खराबी आने का क्रम जारी था। करीब एक माह पूर्व ‘अमर उजाला’ ने इसको लेकर खबर भी प्रकाशित की थी बावजूद संजीदगी न दिखाए जाने का परिणाम हुआ कि दो ट्रेनों की भिड़ंत ने दो श्रद्धालुओं की जिंदगियां छीन लीं। इस हादसे का कारण क्या था, इसका तो खुलासा नहीं हो पाया है । आगे इस तरह के हादसे न होने पाएं इसको लेकर स्थानीय जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल खड़ा कर दिया है।