सोनभद्र। हाल के महीनों में जेल से छूटकर आए नक्सली लोस चुनाव में सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकते हैं। बताते हैं कि सीमा से सटे इलाकों में ऐसे नक्सलियों की चहलकदमी तेजी से बढ़ी है। इसे लेकर सुरक्षा से जुड़े तंत्र बेचैन हो गए हैं। स्थानीय सुरक्षा तंत्र के साथ, गृह मंत्रालय से जुड़ी सुरक्षा जांच एजेंसियों ने भी जनपद के हालात पर नजर रख रही है।
सूत्र बताते हैं कि सुरक्षा से जुड़ी केंद्रीय जांच एजेंसियां नक्सलवाद को आतंकवाद के बाद दूसरे नंबर का खतरा मानकर चल रही हैं। लोस चुनाव के दौरान इनकी ओर से बड़े पैमाने पर उत्पात मचाए जाने की खबरें भी विभिन्न स्रोतों से गृह मंत्रालय तक पहुंच चुकी हैं। वहीं हाल के महीनों में उप्र और बिहार के कई नक्सली छूटकर बाहर आए हैं। इसमें कई को फिर से नक्सली गतिविधियों में शामिल होने की खबरें आ रही हैं। इसको देखते हुए सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी नजरें जनपद पर तो गड़ा ही दी है जिले स्तर से भी सीमा पर मोर्चेबंदी तेज कर दी गई है। सीमा क्षेत्र में लगातार कांबिंग शुरू करने के साथ, बार्डर पर मौजूद थानों, चौकियों और चेकपोस्टों को हर संभावित खतरों के प्रति सतर्क कर दिया गया है। बावजूद पिछले दिनों चंदौली निवासी रंजीत पासवान की बिहार में गिरफ्तारी और तीन दिन पूर्व छत्तीसगढ़ की सीमा में लकड़ी लेने गए नौ ग्रामीणों की पिटाई का वाकया जिस तरह सामने आया, उसने हर किसी को चिंतित कर दिया है। बता दें कि वर्ष 2006 तक मांची थाना क्षेत्र का महुल्री, जहां नक्सलियों का ट्रेनिंग स्थल बना हुआ था।
झारखंड, छत्तीसगढ़ और मप्र की स्थितियां अब भी नक्सली गतिविधियों के लिहाज से संवेदनशील हैं। ऐसे में सुरक्षा के मोर्चे पर जरा सी चूक बड़ी वारदात का सबब बनी नजर आ सकती है। उधर, एसपी रामबहादुर यादव कहते हैं कि सीमा पार के हालात पर नजर रखी जा रही है। हर संभव सतर्कता बरती जा रही है। किसी भी हाल में नक्सलियों को जनपद की सीमा में घुसने नहीं दिया जाएगा।