अनपरा । गड्ढे में तब्दील रेणुकूट-अनपरा मार्ग के मरम्मत का कार्य पूरा हो गया है। बड़े-बड़े गड्ढों को भर कर गिट्टी मिले तारकोल का लेप कर उन्हें ढक दिया गया है लेकिन पटरी का निर्माण न कराए जाने से हादसे हो रहे हैं। तेज रफ्तार ट्रेलर को देख जब बाइक सवार पटरी का सहारा लेता है तो अनियंत्रित होकर गिर जाता है। कभी-कभी यह हादसा बड़ा रूप भी ले रहा है।
केस : रेणुकूट-अनपरा के बीच बैरपान के पास एक ट्रेलर खराब होकर सड़क पर खड़ा था। अनपरा जा रही सोनभद्र डिपो की रोडवेज बस जैसे ही अंधा मोड़ के आगे पहुंची रेणुकूट की तरफ जा रहा ट्रेलर सामने आ गया। चालक बिंदू की सूझबूझ काम आई और बस की स्टेयरिंग पटरी की तरफ मोड़ दिया लेकिन सड़क व पसरी में करीब आधा फीट का अंतर होने के कारण बस करवट हो गई। इस घटना से यात्री कांप उठे। गमीमत था कि बस पलटी नहीं और लोगों ने बस चालऌक की पीठ थपथपाई।
रेणुकूट-अनपरा मार्ग पर दिन-रात वाहन फर्राट भरते रहते हैं। वाहनों की बढ़ती संख्या और लोड के हिसाब से देखा जाए तो सड़कों की मोटाई मानक के अनुरूप कम से कम 58 सेंटीमीटर होनी चाहिए, लेकिन यहां इसके विपरीत है। काली लेयर समेत सड़क की मोटाई सिर्फ 28 से 30 सेमी. ही है। इन पर ओवरलोड वाहनों के गुजरने से सड़कें आए दिन टूट जाती हैं और गड्ढे हो जाते हैं। यही फिर हादसे का कारण बनते हैं और राहगीर मौत के आगोश में समा जाते हैं। पटरियों की बात करें तो ये पहले ही जानलेवा घोषित हो चुकी हैं। इसके पीछे कारण सड़क के सहारे पटरियां बनी ही नहीं हैं। वे सड़क से एक फीट से भी ज्यादा नीची हैं। कहीं-कहीं तो 10 से 20 फीट खाई है। पटरियां न होने से बाइक सवारों की जानें ज्यादा गई हैं। चूंकि बड़े वाहन के पीछे से हार्न देने पर बाइक सवार पटरी पर उतर जाता है और जब वह नीची पटरी से ऊंची सड़क पर बाइक चढ़ाने की कोशिश करता है तो पलट जाता है। ऐसे में सड़क पर दौड़ रहा बड़ा वाहन उसे रौंद जाता है।
सही जानकारी देने से कतरा रहे अधिकारी...
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता देवपाल से इस संबंध जानकारी लेने की कोशिश की गई कि सड़क का निर्माण तो कराया गया लेकिन पटरी नहीं बनी। सवाल जानने के बाद उसका उत्तर देने की बजाय यह कहते हुए तत्काल फोन काट दिया गया कि मिटिंग में है और बाद में बात करेंगे।