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ऊर्जांचल में पानी को लेकर जद्दोजहद शुरू

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ऊर्जांचल में पानी को लेकर जद्दोजहद शुरू हो गई है। भाट क्षेत्र के छह गांव के लोग दूर दराज से पीने के लिए पानी ढो कर ला रहे। जबकि रिहंद जलाशय के दूषित जल से भी प्यास बुझाना लोगों की मजबूरी है। ऐसे में कुछ ग्राम पंचायतों में टैंकरों से प्रभावित इलाकों में पीने का पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा। लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा।
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ऊर्जांचल में कुछ स्थानों को अपवाद स्वरूप छोड़ दिया जाए तो कोई ऐसा नगर और गांव नहीं है जहां गर्मी में पानी की किल्लत पर शोर न मचा हो। सुबह से शाम और देर रात तक हैंडपम्पों व कुओं पर बर्तनों के साथ जनसामान्य की भीड़ न हो। यहां गर्मी की तपन बूंद-बूंद पानी के मोल को समझा रही है। बावजूद इसके आम लोगों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने में शासन प्रशासन अभी तक कामयाब नहीं हो सका है। सबसे खराब स्थिति तो अनपरा से लगे भाट क्षेत्र की है। लोझरा, खजुरा, मिर्चाधुरी, बियहवां, बेलादह, जोगिंद्रा, पडऱवां आदि गांव में एक माह पहले से ही पानी की किल्लत शुरू हो गई। जैसे-जैसे तापमान चढ़ रहा है पानी को लेकर इस इलाके में हाहाकार भी मचता जा रहा है। हालांकि ऊर्जांचल की ग्राम पंचायतें जलसंकट से निपटने के लिए हाथपांव मार रही और टैंकरों से पानी की सप्लाई भी की जा रही लेकिन यहा नाकाफी साबित हो रहा।
इस संबंध में जिला पंचायत सदस्य कुलडोमरी बालकेश्वर सिंह ने बताया कि भाट क्षेत्र के जिन गांवों में पेयजल की किल्लत की सूचना मिल रही वहां की समस्या से जिला प्रशासन के साथ ही संबंधित परियोजना के प्रबंधन को अवगत कराकर टैंकर से पानी सप्लाई की व्यवस्था की जा रही है।
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