सोनभद्र। मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों को भुगतान के लिए चक्कर नहीं लगाना होगा। मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों के मास्टर रोल का एमआईएस कार्य शुरु होने के 30 दिन के भीतर करना अनिवार्य हो गया है। 30 दिन के भीतर मस्टररोल का एमआईएस नहीं हुआ तो संबंधित मजदूरों की मजदूरी का भुगतान नहीं हो सकेगा। शासन का सभी बीडीओ को निर्धारित समय के भीतर श्रमिकों के मस्टररोल का एमआईएस कराने का फरमान पहुंच गया है।
मनरेगा योजना के तहत जिले में तीन लाख एक हजार श्रमिक पंजीकृत हैं। लेकिन इनमें से प्रत्येक वर्ष मनरेगा के करीब एक लाख 61 हजार श्रमिकों को ही काम मिल रहा है। जबकि साल में प्रत्येक जॉब कार्डधारक को कम से कम सौ दिन रोजगार मुहैया कराने का निर्देश है। लेकिन जिले में वर्ष 2007 से 2010 के बीच मनरेगा में बड़े पैमाने पर हुए घोटाले की सीबीआई जांच शुरू होने से अधिकांश प्रधानों ने मनरेगा से न के बराबर काम करा रहे हैं। मनरेगा के तहत काम करने वाले श्रमिकों को मेहनताना लेने के लिए काफी चक्कर लगाना पड़ता है। समय से मजदूरी न मिलने के कारण श्रमिक भी मनरेगा के तहत काम करने में रूचि नहीं ले रहे हैं। हालांकि योगी सरकार ने जिला प्रशासन को मनरेगा श्रमिकों के मस्टरोल की एमआईएस माह भर के भीतर कराने का निर्देश दिया है, ताकि अविलंब उन्हें मजदूरी मिल सके। निर्धिारित समय के भीतर श्रमिकों केे मस्टररोल का एमआईएस न होने पर मजदूरी नहीं मिलेगी। डीएम पीके उपाध्याय ने सभी बीडीओ को शासनादेश के तहत श्रमिकों के मस्टररोल का एमआईएस कराने का निर्देश दे दिया है। डीएम ने कहा कि मस्टररोल का एमआईएस कराने में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।