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किसान दबाव में, सर्वे के नाम पर हो रहे प्रताड़ित

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सोनभद्र। यूपी सरकार फसल ऋण माफी योजना चला रही है, ताकि कर्ज के बोझ के तले दबे किसानों को राहत दी जा सके। प्रशासन ने इसके लिए 16160 किसानों को चिन्हित किया हैं। लेखपालों को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन लेखपाल सर्वे के नाम पर किसानों का उत्पीडन कर रहे हैं। रिपोर्ट लगाने के लिए मनमाफिक डिमांड कर रहे हैं। इससे किसानों में असंतोष है।
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विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने सरकार बनने पर किसानों का एक लाख तक का ऋण माफ करने का वादा किया था। सरकार बनी तो इस पर अमल भी शुरू हुआ। लघु और सीमांत ऐसे किसान जिनके पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है, उन्हें इस योजना से लाभान्वित किये जाने के लिए चिह्नांकन की प्रक्रिया शुरू हुई। प्रशासन ने करीब 16160 किसानों को ऋण माफी के लिए चिन्हित किया। अब उनकी पात्रता का सर्वे लेखपालों को सौंप दिया गया है। लेखपाल किसानों की जमीन, आधार कार्ड समेत अन्य तरह की जांच कर रहे हैं। सर्वे कर रहे कतिपय लेखपाल चिन्हित किये गए किसानों से रिपोर्ट उनके पक्ष में लगाने के लिए माफ किये जाने वाले धन का करीब दस फीसदी पैसा मांग रहे हैं। लेखपालों के इस रवैये से किसान परेशान हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि कहीं लेखपालों को खुश नहीं किया तो वे गलत रिपोर्ट न लगा दें। किसानों ने इस पर असंतोष जाहिर करते हुए इस पर कार्रवाई की मांग की है।
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