शक्तिनगर। इलाके में आबाद कोयला आधारित पावर प्रोजेक्टों से उत्सर्जित राख को निस्तारित करने के लिए करीब साढ़े आठ सौ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस रकम से बिजली घरों के बांध में जमा करीब 70 लाख टन राख हटाई जाएगी। इस राख का प्रयोग हाईवे निर्माण में होगा।
ऊर्जांचल में एनटीपीसी का 4760 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का देश का सबसे बड़ा थर्मल पावर विंध्याचल, 2000 मेगावाट का शक्तिनगर (सिंगरौली), 3000 मेगावाट क्षमता का रिहंद सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट स्थित है। कोयला आधारित इन पावर प्लांटों में रोजाना एक लाख टन से अधिक कोयला जलता है। इसके चलते उत्सर्जित राख का निस्तारण बड़ी समस्या बन गई है। इससे पैदा प्रदूषण पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की चिंता व दिशा-निर्देश व सरकार के रुख पर राख के सुरक्षित निस्तारण की कई योजनाएं बनाई गई। मई में शक्तिनगर, विंध्याचल व रिहंद ने राख निस्तारण के लिए क्रमशः टेंडर निकाला। करीब नौ सौ करोड़ के तीन टेंडरों में ट्रांसपोर्टरों ने रुचि दिखाई।
शक्तिनगर व विंध्याचल पावर प्रोजेक्ट का टेंडर खुल गया है। यह एनटीपीसी के प्रस्तावित रेट से कम है। रिहंद का टेंडर जल्द खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। पावर प्रोजेक्ट से जुड़े अफसरों का कहना है कि कागजी औपचारिकता पूरी करने वाले न्यूनतम रेट कोड करने वाले ट्रांसपोर्टरों को इसी माह कार्यादेश जारी कर दिया जाएगा। राख हटने से पावर प्रोजेक्टों की राख भंडारण क्षमता में वृद्धि होगी और राख बांधों में जमा लाखों टन राख को हाईवे निर्माण में प्रयोग किया जा सकेगा। इससे उन सड़क परियोजनाओं को गति मिलेगी जो मिट्टी, बालू भराव व उपलब्धता को लेकर चिंता में हैं।
पर्यावरण संरक्षण के साथ राख का हटाव कई मायने में अहम है। एनटीपीसी राख के सुरक्षित उपयोग पर काम रही है। फिलहाल शक्तिनगर पावर प्लांट के राख बांध से 24 लाख टन राख हटाने की योजना है। - ओमप्रकाश, वरिष्ठ प्रबंधक, मानव संसाधन, एनटीपीसी शक्तिनगर।