ओबरा। भयंकर जल संकट झेल रहे रेणुकापार के आदिवासी अंचलों में जल संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन की उदासीनता पर ग्रामीण अब परेशान होते जा रहे हैं। कई वर्षों से बरती जा रही उपेक्षा को लेकर अब ग्रामीण जिला प्रशासन पर तरह.तरह के आरोप लगाने लगे हैं। शनिवार को ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के विरोध में मौन प्रदर्शन किया। कहा कि जिला प्रशासन निर्वाचन कार्यों में जिस तरह गंभीरता दिखा रहा है वैसी गंभीरता ग्रामीणों के गंभीर समस्या के निस्तारण में नहीं दिखा रहा है।
ग्रामीणों का आक्रोश रेणुकापार की सबसे बड़ी बंधियों में एक पनारी ग्राम पंचायत की शक्तिचौरा बंधी के पिछले कई वर्षों से टूटे पड़े तटबंधों को लेकर था। पनारी ग्राम पंचायत के करमसार में स्थित बंधी के टूटे तटबंध की मरम्मत की मांग को लेकर ग्रामीणों ने विशेष अंदाज में प्रदर्शन किया। कई हेक्टेयर में फैली बंधी के तटबंध टूटने के कारण बारिश का ज्यादातर पानी टूटे तटबंध के रास्ते बह जाता है। ग्रामीणों ने मांग किया है कि गत वर्ष बलुई बंधी के टूटे तटबंध के तर्ज पर मानसून सत्र से पहले ही शक्तिचौरा बंधी के तटबंध का निर्माण कराया जाए। बताया कि बंधी में अपेक्षित मात्रा में पानी संचय न होने का पूरे वर्ष असर पड़ता है। प्रदर्शन के दौरान जगदीश खरवार, सनोज, राम कुमार यादव, रघुवीर, लक्ष्मण भारती, धंमतिया, लक्ष्मी प्रसाद, सीताराम, भगवान दास, राजू प्रसाद, रमेश, लल्लूराम, दयाराम, महेंद्र, जगरनाथ आदि ग्रामीण मौजूद रहे।