सोनभद्र। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर अध्यनरत 245283 बच्चों को पका पकाया भोजन दिया जा रहा है। मेन्यू के अनुसार बच्चों को मिल रहा है या नहीं इसकी जांच के लिए डीपीओ ने आठों ब्लॉक में एक-एक टीमें गठित कर दी है। टीमें जांच कर रिपोर्ट डीपीओ को सौपेंगी। जिन केेंद्रों पर मेन्यू के अनुसार भोजन न दिए जाने की पुष्टि होगी वहां के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्यवाही होगी।
राबर्ट्सगंज, घोरावल, चतरा, नगवां, चोपन, म्योपुर, बभनी और दुद्धी ब्लॉक क्षेत्र में 1825 संचालित 1825 आंगनबाड़ी केेंद्रों पर 31 जुलाई तक शून्य से पांच वर्ष तक के 245283 बच्चें पंजीकृत है। तत्कालीन सपा सरकार ने बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए अनुपुरूक पोषाहार, हाटकुक्ट एवं हौसला पोषण योजनाएं शुरू की थी। हाटकुक्ट योजना से आंगनबाड़ी केंद्रों पर अध्यनरत बच्चों को पका पकाया भोजन एवं हौसला पोषण योजना से घी समेत अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ दिया जाता था। लेकिन वर्ष 2017 में सूबे की कमान संभालते ही भाजपा की सरकार ने उक्त योजना को बंद कर दिया। योजनाओं के बंद होने से कुपोषित बच्चों की संख्या घटने की बजाय बढने लगी है। इसे गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार ने पुन: आंगनबाड़ी केंद्रों पर अध्यनरत तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को पका पकाया भोजन देने के व्यवस्था शुरू कर दी है। जनवरी माह से प्रधानों एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से भोजन दिया जा रहा है। मेन्यू के अनुसार बच्चों को भोजन दिया जाता है, लेकिन कई केंद्रों पर मनमाने ढंग से दिया जा रहा है। मामला संज्ञान में आने पर डीपीओ ने जांच शुरू करा दी है। इस संबंध में जिला कार्यक्रम अधिकारी अजीत सिंह ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तायुक्त पका पकाया भोजन मिल रहा है या नहीं इसकी जांच के लिए आठ टीमें बनाई गई है।