रेणुकूट। पिपरी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के खेल मैदान में चल रहे संगीतमयी श्रीराम कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को कथावाचक दिलीप कृष्ण भारद्वाज ने रामजन्म की कथा का रसपान श्रोताओं को कराया।उन्होंने कहा कि महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ आरंभ करने की ठानी। महाराज की आज्ञानुसार श्यामकर्ण घोड़ा चतुरंगिनी सेना के साथ छुड़वा दिया गया। दशरथ ने मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकांड पंडितों को यज्ञ संपन्न कराने के लिये आमंत्रित किया। निश्चित समय आने पर सभी अभ्यागतों के साथ महाराज दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ तथा अपने मित्र अंग देश के अधिपति ऋंग ऋषि को लेकर यज्ञ मंडप में पहुंचे। यज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया। कहा राजा दशरथ ने यज्ञ के प्रसाद खीर को अपने महल में ले जाकर अपनी तीनों रानियों में वितरित कर दिया। प्रसाद ग्रहण करने के परिणाम स्वरूप तीनों रानियों ने गर्भधारण किया। कर्क लग्न का उदय होते ही महाराज दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या के गर्भ से एक शिशु का जन्म हुआ। उस शिशु को देखने वाले देखते रह जाते थे। इसके बाद शुभ नक्षत्रों और शुभ घड़ी में महारानी कैकेयी के एक तथा तीसरी रानी सुमित्रा के दो तेजस्वी पुत्रों का जन्म हुआ। संपूर्ण राज्य में आनंद मनाया जाने लगा। महाराज के चार पुत्रों के जन्म के उल्लास में गंधर्व गान करने लगे और अप्सराएं नृत्य करने लगीं। देवता अपने विमानों में बैठ कर पुष्प वर्षा करने लगे। चारों पुत्रों का नामकरण संस्कार महर्षि वशिष्ठ ने किया। उनके नाम रामचंद्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे गए। श्री राम कथा के दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष दिग्विजय प्रताप सिंह, अशोक त्रिपाठी, शत्रुघन सिंह, गीता सिंह, शिव प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।