सोनभद्र। जिले में वर्ष 2017-18 में लक्ष्य के सापेक्ष महज 46 प्रतिशत ही गेहूं की खरीद हो सकी है । 63000 मिट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य मिला था, जिसके सापेक्ष महज 34 हजार एमटी ही गेहूं की खरीद हो सकी। केंद्रों पर सुविधाएं न मिलने के कारण किसानों ने गेहूं विक्रय करने में रूचि नहीं दिखाया। जबकि आरटीजेएस के माध्यम से किसानों का तत्काल भुगतान किया गया।
बताते चले कि शासन ने जिला प्रशासन को 63000 हजार मीट्रिक टन गेहूं क्रय करने का लक्ष्य दिया निर्धारित किया था। गेहूं क्रय करने के लिए खाद विभाग के चार केंद्र, पीसीएफ के 29, कर्मचारी कल्या निगम के चार, खाद्य विभाग के दो, अडको के दो और एग्री कल्चर के एक क्रय केंद्र खोले गये थे। प्रत्येक केंद्र पर दो इलेक्ट्रानिक कांटा भी लगाया गया। यहां एक अप्रैल से गेहूं की खरीद शुरू हुई जो 15 जून तक चला। इस दौरान करीब 34 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई। केंद्रों पर किसानों को शुुद्ध पेयजल, रोशनी, धूप से बचने आदि की व्यवस्थाएं की जानी थी। लेकिन अधिकांश केंद्रों पर किसानों को सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई। जबकि केंद्र प्रभारियों को सख्त हिदायत दी गई थी किसानों को असुविधा होने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिला विपणन अधिकारी अंशुमाली शंकर ने क हा कि पिछले वर्ष महज 1700 एमटी गेहूं की खरीद हुई थी। लेकिन इस वर्ष रिकार्ड तोड़ 34 हजार मीट्रिक टन खरीद हुई है। उन्होंने बताया कि पिछले दस सालों के अंतराल में गेहूं की खरीद नहीं हुई थी। आरटीजीएस के माध्यम से गेहूं बेचने वाले किसानों के खाते में सीधे धन भेज कर उनका भुगतान कर दिया गया है।