सरकार परिषदीय शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए शिक्षकों की भर्ती भले करे लेकिन जिला स्तर पर मनमानी के चलते शिक्षा व्यवस्था बेपटरी हो रही है। हाल में ही बीटीसी प्रशिक्षु शिक्षकों की तैनाती इसका उदाहरण है। महज डेढ़ सौ शिक्षकों में से 79 शिक्षकों को राबर्ट्सगंज ब्लॉक में तैनाती दी गई। जबकि अन्य पिछड़े ब्लाकों की उपेक्षा कर दी गई।
जिले में परिषदीय शिक्षा व्यवस्था बेपटरी है। पूर्व में ही तैनात शिक्षकों का समायोजन ठीक ढंग से न होने के कारण नक्सल और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या काफी कम है। इससे पठन-पाठन प्रभावित होता है। पूूर्व में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अगड़े और पिछड़े ब्लाक चिह्नित किए गए थे। उसी आधार पर पहले पिछड़े ब्लाकों के विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती की जाती थी ताकि शिक्षकों की कमी या संख्या की असमानता को दूर किया जा सके।
लेकिन हाल में ही बीटीसी प्रशिक्षुओं की तैनाती में इसका ख्याल नहीं रखा गया है। अगड़े ब्लाक राबर्ट्सगंज, चोपन, घोरावल, चतरा में अधिक शिक्षकों को तैनात कर दिया गया है। महज डेढ़ सौ बीटीसी प्रशिक्षु शिक्षकों को तैनाती देनी थी। इसमें राबर्ट्सगंज ब्लाक में 43, चोपन ब्लॉक में 36, घोरावल में 23 और चतरा में 12 शिक्षकों को तैनात कर दिया गया। इस तरह 150 में से 114 शिक्षक अगड़े ब्लॉक में ही तैनात कर दिये गए। शेष बचे 36 शिक्षकों को पिछड़े ब्लॉकों में समायोजित कर दिया गया।
खास बात यह है कि नगवां ब्लॉक में सिर्फ एक शिक्षक तैनात किया गया। इसी तरह दुद्धी, बभनी और म्योरपुर में भी कम शिक्षकों को तैनात किया गया है। जबकि विद्यालयों में शिक्षकों की कमी का ख्याल नहीं रखा गया। कई ऐसे विद्यालय हैं जहां महज एक शिक्षक ही तैनात है। जबकि तमाम विद्यालयों में तीन-तीन शिक्षकों की तैनाती पूर्व में की गई है। ऐसे में परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में कैसे सुधार होगा, यह सवाल उठना लाजिमी है।