जल संकट से जूझ रहे जिले में वर्षा जल संचयन के लिए चेकडैम का निर्माण होगा। हर ब्लॉक में 7-8 चेकडैम बनाए जाएंगे। इनका निर्माण उन पहाड़ी नालों व नदियों पर होगा, जो हर साल बारिश में उफनाती हैं।
यह पानी कुछ दिनों में ही बहकर बड़ी नदियों में चला जाता है। चेकडैम के माध्यम से पानी संग्रहित कर इसे सिंचाई के इस्तेमाल में लाया जाएगा। इससे भूजल स्तर को भी नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी।
चौतरफा पहाड़ियों से घिरे जिले में पानी का संकट गंभीर है। वर्षा के दिनों में उफनाने वाले पहाड़ी नाले गर्मी में पूरी तरह सूख जाते हैं। इनमें पशुओं के पेयजल के लिए भी पानी नहीं बचता।
वर्षा जल प्रबंधन की समुचित योजना न होने से सैकड़ों गांवों में लोग पानी के संकट से जूझने को विवश हैं। इससे फसलों की सिंचाई भी प्रभावित होती है। जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन ने वर्षा जल संचयन की योजना बनाई है।
सीडीओ जागृति अवस्थी की पहल पर हर ब्लॉक में वहां की जरूरत के अनुसार 7-8 चेकडैम बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में पूरे जिले में 79 चेकडैमों के निर्माण के लिए स्थल का चयन किया गया है।
इसे बरसात से पहले 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह चेकडैम पहाड़ी नदी, नालों के पास बनाए जाएंगे, जिससे पानी संग्रहित करने में मदद मिलेगी। छोटे-छोटे चेकडैम में लगभग 419697 क्यूबिक मीटर जल भराव होगा और लगभग 1044.10 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
यह कार्य मनरेगा के तहत कराया जाना है। एक चेकडैम के निर्माण पर करीब 10 लाख रुपये तक खर्च का अनुमान है। मनरेगा के तहत कार्य से गांव के मजदूरों को भी काम मिलेगा।
मनरेगा के माध्यम से इस सत्र में 79 चेकडैम का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए जगह चिह्नित कर ली गई है। काम भी शुरू करा दिया गया है। 30 जून तक इसे पूरा कर लिया जाएगा, ताकि बरसात का पानी इसमें संग्रहित किया जा सके। चेकडैम बनने से सिंचाई की समस्या का भी समाधान होगा।
-रवींद्र वीर सिंह, उपायुक्त मनरेगा।