आकांक्षी जनपद सोनभद्र में बेसिक शिक्षा की व्यवस्था में खास सुधार नहीं हुआ है। छतीसगढ़ सीमा से सटे आदिवासी बहुल क्षेत्र सालेनाग स्थित प्राथमिक विद्यालय को एक वर्ष बाद भी खुद का भवन नहीं मिल सका है।
इससे विद्यालय में पंजीकृत कक्षा एक से पांच तक के 73 विद्यार्थी एक निजी मकान के बरामदे में पढ़ाई करने को विवश हैं। इससे न सिर्फ पठन पाठन प्रभावित हो रहा है, बल्कि विद्यालय भवन नहीं बनने से असुविधा भी हो रही है।
सालेनाग गांव में वर्ष 2004 में लाखों रुपये की लागत से भूकंप रोधी विद्यालय भवन का निर्माण कराया गया था। 20 वर्ष बाद उस भवन को जर्जर दिखा कर बेसिक शिक्षा विभाग ने भवन की नीलामी करते हुए पिछले वर्ष ध्वस्त करा दिया।
परिसर में अब सिर्फ शौचालय और रसोई घर का ही भवन बचा है। इससे विवश होकर विद्यालय को बगल के निजी मकान में संचालित किया जा रहा है। मौजूदा समय में विद्यालय में 73 बच्चे नामांकित हैं।
इस विद्यालय में कक्षा एक में 15, कक्षा दो में 13, कक्षा तीन में 13, कक्षा चार में 12 और कक्षा पांच में 20 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय में दो अध्यापक और तीन शिक्षा मित्र हैं। किसी तरह एक वर्ष से विद्यालय का संचालन निजी मकान में किया जा रहा है। विद्यालय भवन न होने से बच्चों की पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही है।
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कई बार प्रार्थना पत्र दे चुके हैं प्रधानाध्यापक
प्राथमिक विद्यालय सालेनाग के प्रभारी प्रधानाध्यापक बाल किशुन के मुताबिक भवन न होने की सूचना उच्चाधिकारियों को पत्र के माध्यम से दी गई है। मगर अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। वहीं प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्रीप्रसाद ने बताया कि विद्यालय भवन न होने से यहां के बच्चों की पढ़ाई और उससे संबंधित क्रियाकलाप प्रभावित हो रहे हैं। अभिभावकों ने भी बेसिक शिक्षा विभाग के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र के माध्यम से अवगत कराया मगर अभी तक कुछ नहीं हुआ।
जर्जर भवनों को तोड़वाया गया है। उच्चाधिकारियों को अवगत भी कराया गया है। जैसे ही परियोजना द्वारा धन आवंटित हो जाता है भवन बनेगा।जब तक धन आवंटित नहीं हो जाता तब तक विद्यालय का भवन बनना संभव नहीं है।
-राकेश कुमार पांडेय, खंड शिक्षा अधिकारी-बभनी