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श्रीराम का जन्म होते ही गूंजने लगा सोहर

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सोनभद्र। राबर्ट्सगंज नगर के आरटीएस क्लब में श्रीराम चरित नवाह् पाठ महायज्ञ समिति के तत्वावधान में चल रहे श्रीराम चरित नवाह् परायण महायज्ञ के दूसरे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं का हुजूम उमड पड़ा। पूरे दिन महिला और पुरूषों ने यज्ञ मंडप की परिक्रमा किया। श्रीराम का जन्म होते ही सोहर गूंजने लगा। उधर मंगलवार की रात मानस मर्मज्ञों ने श्रीराम कथा सुनाकर श्रोताओं को भक्ति की सागर में गोता लगाने के लिए मजबूर कर दिया।
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गोरखपुर से पधारे हेमंत त्रिपाठी ने शिव महिमा सुनाते हुए कहा कि शिव धर्मरत होकर कथा सुनते थे। जबकि माता सती धार्मिक होने का दिखावा की, लेकिन कथा नहीं सुनी। क्योंकि वह दक्ष की बेटी थी। भगवान शिव के समझाने पर भी सती का संसय नहीं मिट सका। आजमगढ़ से पधारे सुधीर त्रिपाठी ने तत्व की विवेचना करते हुए कहा कि राम कथा के तेहि अधिकारी, जिनकी सत्संगति अति प्यारी। अर्थात बिन शिव कृपा से सत्संग सुलभ नहीं होता और सत्संग के बिना रामकथा सुलभ नहीं।
हम मनुष्य किसी का रूप तो बना सकते है तो किसी की चाल को नहीं पकड़ सकते, जबकि भगवान राम ने माता सती के चाल से पहचान लिया कि सीता होती तो पीछे-पीछे चलती थे तो आज आगे-आगे क्यों चल रही है। चलने के तरीके से पहचान लिया कि से सीता नही कोई बहुरूपिया है। प्रयागराज से पधारे मुरारी बापू शास्त्री शिव विवाह पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जीवन मेें यदि शिवत्व लाना है तो बाबा शिव से सादगी का मंत्र सिखना चाहिए। बाबा शिव जब दुल्हा बने तो अपने प्राकृतिक श्रृंगार को धारण किया, इसलिए देवों में दे देव महादेव कहलाये। जगत कल्याण हेतु शिव ने विषपान किया। संचालन आचार्य संतोष कुमार द्विवेदी ने किया। यज्ञ समिति के महामंत्री सुशील पाठक, यजमान किशोर केडिया, शीशु तिवारी, विमलेश सिंह, मुरली अग्रवाल, डॉ. सीवी पांडेय, मुरली जायसवाल, सुशील, महेश दूबे, संजय जायसवाल, राजेंद्र केशरी, सुंदर केशरी, रामविलास सोनी आदि मौजूद रहे।
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