जिला समाज कल्याण से संचालित एकलव्य माडल स्कूल शो-पीस बनकर रह गया है। उसके निर्माण में अनियमितता का आरोप लगाया जा रहा है। आदिवासियों को शिक्षित करने व सस्ती तथा सुलभ शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 2011 में चोपन ब्लाक के पिपरखाड़ गांव में भवन मनाने का काम शुरू हुआ लेकिन आज तक पूरा नहीं हो सका। शासन से पुनरीक्षित लागत 959.30 लाख रुपये की डिमांड की गई है।
पिपरखाड़ गांव में तीन फरवरी 2011 को एकलव्य माडल आवासीय विद्यालय की नींव रखी गई थी। इस विद्यालय में पठन-पाठन का कार्य वर्ष 2016 से प्रारंभ होना था लेकिन सरकारी मशीनरी की लापरवाही के चलते आदिवासियों को शिक्षित करने की इस योजना पर पानी फिर गया। निर्माम कार्य में बरती गई लापरवाही के चलते एकलव्य आवासीय स्कूल के निर्माम पर बजट की कमी पड़ गई। समाज कल्याण निर्माण निगम ने प्रथम चरण में ही पूरा धन खर्च कर दिया। समय से काम पूरा न होने के कारण ही द्वितीय चरण के काम में हाथ नहीं लग सका। इसके बाद शासन से पुनरीक्षित लागत 959.30 लाख रुपये की डिमांड की गई लेकिन यह भारी भरकम बजट न मिलने के कारण दो साल से इस स्कूल के भवन निर्माण का कार्य ठप पड़ा है।
कोट
निदेशालय जनजाति विकास लखनऊ की टीम ने निर्मित भवन का निरीक्षण किया था। वर्ष 2017 में जांच के बाद टीम ने भवन हस्तांतरित कर सत्र प्रारम्भ करने का निर्देश दिया था लेकिन इसी दौरान जिलाधिकारी से भवन की शिकायत की गई। जिसकी वजह से भवन हस्तांतरण नहीं हो सका। इसके अलावा अभी भी भवन में कुछ काम बाकी है। बजट के अभाव में उसे पूरा नहीं किया जा सका है। बजट मिलते ही भवन को पूरा कर सत्र प्रारंभ कर दिया जाएगा।
केएल गुप्ता, समाज कल्याण अधिकारी