तकनीकी कारणों से बंद 500 मेगावाट की अनपरा डी परियोजना की सातवीं इकाई विगत छह माह के लंबे अंतराल के बाद 26 फरवरी 2018 को शुरू की गई थी, परन्तु उत्पादन के बाद भी टरबाइन में कंपन जारी है। जिसे उच्च स्तरीय टीम द्वारा सही करने का प्रयास किया जा रहा है। बीएचईएल दिल्ली व हरिद्वार से आई तीन सदस्यीय टीम कंपन के कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है। राहत की बात है कि कंपन के बाद भी इकाई से उत्पादन जारी है। 22 अगस्त 2017 को तकनीकी कारणों से सातवीं इकाई को बंद कर दिया गया था। लगभग छह माह बाद उत्पादनरत होने के बावजूद भी सातवीं इकाई की समस्यायें समाप्त नहीं हुई है। जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि कहीं फिर से इकाई को बंद न करना पड़े। अक्टूबर 2017 में भी इस इकाई को उत्पादनरत करने का प्रयास किया गया था परन्तु अधिक कंपन के कारण पुन: इसे बंद कर दिया गया था। इकाई बंद होने को लेकर ऊर्जामंत्री ने नाराजगी जतायी थी। इस मामले में चार लोगों को चार्जशीट भी दी गयी थी। जिसको लेकर अभियंताओं में रोष था। इस इकाई के बंद होने से अभी तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है।
बीएचईएल अनपरा के निर्माण प्रबंधक सुरेन्द्र प्रसाद ने बताया कि टीम लगातार कंपन के कारणों को ढुढने का प्रयास कर रही है, समस्या का पता होते ही इसे जल्द दुरूस्त करने का प्रयास किया जाएगा।