मधुरिमा साहित्य गोष्ठी के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का बुधवार को 55 वर्ष पूरे हो गए। इसमें ओज के कवियों ने राष्ट्र भक्ति से जुड़ी कविताएं, गीत सुनाकर पूरा माहौल बदल दिया। हास्य कवियों ने श्रोताओं को खूब हंसाया। रात करीब साढ़े नौ बजे से शुरू हुआ कवि सम्मेलन गुरुवार भोर के करीब चार बजे तक चलता रहा। श्रोता भी कवियों की तालियों से हौसला आफजाई करते रहे।
मधुरिमा के उप निदेशक आशुतोष कुमार पांडेय ने कार्यक्रम की शुरूआत कराई। मुख्य अतिथि जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। अध्यक्षता की कमान सभाजीत द्विवेदी प्रखर और संचालन कमलेश राजहंस ने किया। कवियत्री पूनम श्रीवास्तव ने मां सरस्वती वंदना की। इलाहाबाद के अखिलेश द्विवेदी ने हास्य की रचनाएं प्रस्तुत कर लोगों को खूब हंसाया। उनकी रचना कभी सर्दी कभी बारिश कभी दोपहर से गुजरे, लुटाया प्यास है हमने जिस शहर से गुजरे सराही गई। डॉ. दिनेश दिनकर ने तिमिर के साम्राज्य का बागी बना मै घूमता हूं, राख के नीचे दबी चिंगारियों को ढूंढता हूं कविता सुनाई। पूनम श्रीवास्तव ने सुबह लिख दूंगी, शाम लिख दूंगी, देश को मैं अपना सलाम लिख दूंगी रचना सुनाई। पटना के शंकर कैमूरी ने की लाख चाहे कोई मिट नहीं सकती, ख्वाजा अजमेरी और रामलखन की जोड़ी रचना सराही गई। अशोक बेशरम ने भी अपनी हास्य की रचनाओं से लोगों को खूब गुदगुदाया। जमुना प्रसाद उपाध्याय ने हम हैं कि नई पौध लगाने पे तुुले हैं, बरगद है कि पौध पनपने नहीं देते सुनाया। नरेंद्र मिश्र की मैं ही तुलसी, मैं ही सूर, मैं ही रसखानी मिट्टी हूं रचना सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी। शमीम गाजीपुर ने ये रात भी जरा ढल जाने दो, वो जरूर आयेगा माहौल बदल जाने दो गजल सुनाया। अध्यक्षता कर रहे सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने इनके खातिर सभी झमेले हैं, कच्ची गोली नहीं ये खेले हैं कविता सुनाया। यहां सलीम शिवालवी, अर्चना शुक्ला, अशोक अज्ञान, प्रद्युम्न तिवारी, नपा अध्यक्ष वीरेंद जायसवाल, रामसमुझ भाष्कर, अशोक तातंबरी, परमानंद आनंद, ईश्वर विरागी, जयराम सोनी, अशोक तिवारी, नजर मोहम्मद नजर ने भी काव्य पाठ किया। इस दौरान सदर विधायक भूपेश चौबे, पूर्व चेयरमैन कृष्ण मुरारी गुप्ता, राजेश द्विवेदी, अभिषेक सिंह, धीरज पांडेय धीरू, अमित चतुर्वेदी, फरीद अहमद, गोपाल स्वरूप पाठक, राजेंद्र प्रसाद आदि मौजूद रहे।