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निकालो नफ़रतें दिल से, मुहब्बत से इसे भर लो

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दुद्धी। तहसील परिसर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा शनिवार की रात संपन्न हुआ। यहां आये ओज, हास्य और श्रृंगार रस के कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटा। कवयित्रियों के गीत काफी सराहे गए। नायब तहसीलदार कैलाश यादव, कोतवाल विनोद यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
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कवयित्री मीरा तिवारी ने वाणी वंदना वीणा मधुर बजा दो, ज्ञान कोश की दिव्य ज्योति मेरे भाल सजा दो से कवि सम्मेलन की शुरूआत की। अजय प्रेमी की कविता अभी भी आन बाकी है, अभी भी शान बाकी है, बहुत से लोग ऐसे हैं, जहां ईमान बाकी है, सुनाया। शादाब आजमी ने अम्न वफ़ा का दीप जलाने आया हूं ,नफरत को दिल से मिटाने आया हूं, हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, सब को अपने गले लगाने आया हूं, पढ़कर देश की एकता और अखंडता पर जोर दिया। अखिलेश द्विवेदी ने मुहब्बत के तराने जब लबों तक नही आएंगे गीत सुनाया। चित्तौड़ से आई डॉ. प्रेरणा ठाकरे ने कभी अच्छा किया कुछ ना, तो एक काम को कर लो। निकालो नफ़रतें दिल से, मुहब्बत से इसे भर लो, गीत सुनाकर वाहवाही लूटी।
संचालन कर रहे कवि कमलेश राजहंस ने पड़ा है बाग झूला, तुम्हें झुलाऊँगा, तुम्हारे हर कदम पर दिया दिल के जलाऊंगा, ओज कविता सुनाई। हसन सोनभद्री की वह रचना जिसने सभी को गंभीर कर दिया कि - ये दादी अब्बू को खत लिख दोगी न- सुनाकर एक विशेष चिंतन छोड़ गए। अतुल ज्वाला, हसन सोनभद्री ने भी रचनाएं सुनाईं। इस मौके पर रामलोचन तिवारी, क्रय विक्रय चेयरमैन जुबेर आलम, मदन तिवारी, शिवशंकर, रामेश्वर राय, महेशानंद, हरिशंकर यादव, अयूब खां, मनोज तिवारी, आशीष गुप्ता, पंकज अग्रहरि, कन्हैया लाल अग्रहरि, आलोक अग्रहरि आदि मौजूद रहे। संचालन दिनेश अग्रहरी ने किया।
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