सोनभद्र (म्योरपुर)। वनवासी सेवा आश्रम के विचित्रा महाकक्ष में रविवार को आश्रम और गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति नई दिल्ली के संयुक्त आयोजन में रचनात्मक कार्यक्रमों में महिलाओं की भूमिका पर आयोजित सम्मेलन में चर्चा हुई। सम्मेलन में अंधविश्वास, दहेज प्रथा, बाल विवाह, दहेज उत्पीड़न, महिला अधिकार एवं कानून जैसे ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की गई।
दिल्ली से आई अधिवक्ता गीता वर्मा ने कहा कि मां-बाप बच्चों के साथ सकारात्मक बातचीत और समय-समय पर चर्चा करते रहें। जब एक जगह बैठकर टीवी देख सकते हैं तो बच्चों से बातचीत कर उन्हें सही रास्ते पर जाने की चर्चा क्यों नहीं कर सकते। कहा कि दहेज हम सब के गलत सोच एवं दिखावे की देन है, क्योंकि जब हम लड़का देखने जाते हैं तो उसका गुण नहीं सुंदरता देखते हैं। आह्वान किया कि बहनें दिखावा और फजूल खर्ची से बचें तथा गलत आरोप लगाकर दहेज उत्पीड़न जैसे केस करने से परहेज करें। खुलकर बोलें और गलत व्यक्ति का विरोध करें, बेटियों से सहेली सा व्यवहार करें। बदायूं से आई सविता मालपानी ने छात्राओं पर तंज कसने की घटना का जिक्र किया, जबकि ग्रामीण क्षेत्र से आई चमेली, फूलमती, नीरा, सुनीता ने प्रसव, डायन जैसी परंपराओं पर चर्चा की। इसके पूर्व स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद, पंडित अजय शेखर, नीलम सिंह एवं चमेली ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया तथा शुभा बहन नभे स्वागत भाषण दिया। इस मौके पर राखी जायसवाल, वनीता, कविता, अमिता विश्वकर्मा, मानमती, कमला, स्वर्णलता, रचना बहन, चांदतारा, देवकुमारी, छोटकी देवी, मीरा बहन, सीता देवी समेत दो सौ से ज्यादा महिलाओं ने प्रतिभाग किया। संचालन सविता मालपानी एवं अध्यक्षता नीलम सिंह ने किया।