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टुकड़े में बांट दिए गए करोड़ों की परियोजनाओं के टेंडर

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सोनभद्र। बड़ी परियोजनाओं में टरकी टेंडर (बगैर सक्षम अधिकारी के अनुमति के कार्य-टेंडर का बंटवारा न किए जाने) की व्यवस्था होने के बावजूद, हाल में स्वीकृत की गई करोड़ों की परियोजनाओं के टेंडर टुकड़ों में बांट दिए जाने का मामला सामने आया है। केंद्र स्तर से इसकी वित्तीय स्वीकृति न मिल पाने के कारण जहां मुख्य कार्यदायी विभाग (जल निगम निर्माण शाखा) ने अभी कोई टेंडर नहीं निकाला है। वहीं यूनिसेफ शाखा ने वित्तीय स्वीकृति होने की बात कहते हुए 10 परियोजनाओं से जुड़े 33 ट्यूबवेल बोरिंग के लिए अलग से निविदा आमंत्रित कर ली है।
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घोरावल ब्लाक में विसरेखी, सरवट, कडिय़ा, मोहनी, भरौली, मसी आदिनाथ, मझिगवा चौहान, बरौली, राबटर्सगंज ब्लाक में केकराही, पिपरी, सेमरा, सिद्धीकला, बभनी ब्लाक में खोतोमहुआ, दुद्धी ब्लाक में बघमंदवा, चोपन ब्लाक में चांचीकला, चतरा ब्लाक में कूरा कला, म्योरपुर ब्लाक में सेंदूर और शिशवा ग्राम समूह/ग्राम पंचायत/ग्राम पेयजल परियोजनाओं की स्थापना की जानी है। जल निगम निर्माण शाखा की तरफ से सभी 19 पेयजल परियोजनाओं के लिए करीब 75 करोड़ की लागत का प्राक्कलन तैयार किया गया है, जिसे राज्यस्तरीय कमेटी ने स्वीकृति भी प्रदान कर दी है। अभी वित्तीय स्वीकृति आनी बाकी है। निर्माण निगम के लोगों का कहना है कि वित्तीय स्वीकृति के बाद ही उनके यहां टेंडर प्रक्रिया अपनाने का नियम है। उधर, जल निगम की यूनिसेफ शाखा ने ट्यूबवेल बोरिंग कार्य को अपना मानते हुए इसमें से 10 परियोजनाओं के लिए होने वाली 33 ट्यूबवेल बोरिंग के लिए ऑनलाइन निविदा आठ जनवरी को ही आमंत्रित कर ली। निविदा खोलने की आखिरी तिथि 31 जनवरी तय करते हुए जरूरी प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई।
कुछ यह बताई जा रही टरकी टेंडर व्यवस्था
विभागीय लोगों का कहना है कि मौजूदा सरकार ने बड़े कार्यों के लिए टरकी टेंडर व्यवस्था लागू की है। इसके तहत किसी भी परियोजना के कार्य में से किसी कार्य का अलग से टेंडर निकालने के लिए संबंधित विभाग या अधिकारी समुचित कारण दर्शाते हुए प्रस्ताव चीफ इंजीनियर को भेजेंगे। वहां से इसका परीक्षण करने के बाद ही मंजूरी दी जाएगी, लेकिन परियोजना से जुड़े ट्यूबवेल बोरिंग कार्य की निविदा निकालकर इसकी अनदेखी की गई है।
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अभी परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति नहीं है, इसलिए उनके यहां से अभी टेंडर नहीं निकाला गया है। सामान्यता टेंडर निकालने के लिए टरकी व्यवस्था लागू है। उनको वित्तीय स्वीकृति मिलने से पहले यूनिसेफ शाखा ने किस प्रावधान के तहत परियोजना के बोरिंग का टेंडर अलग से निकाल लिया, इसको उसी विभाग के लोग बता सकते हैं।
- फणींद्र राय, एक्सईएन, जल निगम निर्माण शाखा
न ही मेरे स्तर से कार्य या टेंडर के बंटवारे के लिए कोई स्वीकृति दी गई है, न ही इस बारे में मुझे जल निगम यूनिसेफ शाखा से कोई जानकारी मिली है। बगैर स्वीकृति के लिए पार्ट टेंडर निकालना गलत है। एक्सईएन से इसकी जानकारी तलब की जाएगी।
- एसपी कुरील, चीफ इंजीनियर, जल निगम लखनऊ
मैं तीन महीने से कुंभ के ड्यूटी पर हूं। इस वक्त मेरा काम लखनऊ में कुरील जी देख रहे हैं। मुझे किसी परियोजना स्वीकृति, उसके कार्य के बंटवारे या पार्ट टेंडर की जानकारी नहीं है।
- जीसी दूबे, चीफ इंजीनियर, जल निगम, इलाहाबाद
सोनभद्र ही नहीं पूरे यूपी में इसी तरह टेंडर निकाला गया है। जहां तक स्वीकृति की बात है तो बोरिंग के टेंडर के लिए उन्होंने सक्षम अधिकारी से स्वीकृति ले रखी है। उनसे अगर कोई जवाब तलब होता है तो वह सक्षम अधिकारी का जिक्र करते हुए अपना जवाब भेज देंगे।
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- हिमांशु यादव, एक्सईएन, जल निगम यूनिसेफ शाखा
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