सोनभद्र। देश के तीसरे सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्र में सोनभद्र का नाम है। आए दिन ऐसे उदाहरण भी सामने आ जाते हैं जिससे स्थिति और भयावह दिखती है। जिले के राजकीय कन्या इंटर कालेजों में स्थित सबमर्सिबल पंप और हैंडपंप के पानी के नमूनों की जांच में सबसे भयावह स्थित राबर्ट्सगंज की आई है। यहां विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के पांच गुुना आयरन और 40 गुना ट्यूरबिडिटी(गंदगी) की मात्रा पाई गई है। इससे साफ है कि आबादी को अब पीने का पानी साफ नहीं मिल रहा है। ऐसे में कॉलेजों में आरओ प्लांट लगाने तक की कवायद शुरू कर दी गई है।
2011 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर राजकीय कन्या इंटर कॉलेजों में शुद्ध पेयजल के लिए आरओ प्लांट लगाने की मांग की गई थी। अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो सुनवाई के दौरान नाराज कोर्ट ने गत 21 सितंबर को संबंधित जिले के जिलाधिकारियों के आवास एवं कार्यालय के आरओ (रिवर्स ऑसमोसिस) सिस्टम को राजकीय बालिका इंटर कालेजों में स्थापित करने के आदेश दिए थे। व्यवहारिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुग्रह याचिका दाखिल की। वहां से आदेेश पर रोक लगाने हुए बालिका इंटर कालेजों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इसके क्रम में गत 23 अक्तूबर को अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल ने सोनभद्र सहित सूबे के सभी जिलाधिकारियों से बालिका इंटर कालेजों में पेयजल की गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए। इसी क्रम में जल निगम ने 28 अक्तूबर को दुद्धी, डोहरी, ओबरा, राबर्ट्सगंज से पानी का सैंपल लिया तो पता चला कि प्रदूषण के मामले में राबर्ट्सगंज की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है।
डीआईओएस, सोनभद्र राजशेखर सिंह का कहना है कि जल निगम की रिपोर्ट डीएम के जरिए शासन को भेज दी गई है। वहां से चारों राजकीय बालिका विद्यालयों में आरओ प्लांट लगाने के लिए धनराशि भी अवमुक्त हो गई है। एक्सईएन जल निगम मोहम्मद नसीम का कहना है कि
जिला मुख्यालय के हालात निश्चित तौर पर हैरानजनक हैं। अभी वह हाल में ही यहां आए हैं। राबर्ट्सगंज को लेकर प्लान बनाया जा रहा है।