बभनी। बारिश के साथ बरपता आसमानी कहर लगातार जिंदगियां छीनता जा रहा है। सोमवार की शाम बभनी इलाके के कई गांवों में गिरी बिजली और इसकी चपेट में आकर दो बच्चों की मौत, 11 के झुलसने की घटना से पूरी रात लोग दहशत में रहे। वहीं सीएचसी में मची चीख-पुकार और अपनों की सांसें थमने का डर अलसुबह तक अफरातफरी भरा माहौल रहा। सुबह पौ फटने के साथ ही बिजली से झुलसे लोगों की हालत में राहत मिलती शुरू हो गई।
सोमवार की शाम चकचपकी, चपकी, बड़होर, चौना, बभनी, सुकरवन टोला, जिगनहवां, पोखरा गांव में बारिश के दौरान गिरी बिजली ने कहर बरपा दिया। इससे जहां बभनी के सुकरवन टोला और जरहां ग्राम पंचायत के चेतवा टोले में एक-एक बच्चे की मौत हो गई। वहीं अलग-अलग जगहों पर कुल 11 लोग झुलस गए। आंधी-बारिश के चलते बिजली भी गुल जो गई। इसके चलते बभनी सीएचसी में जेनरेटर चलाकर झुलसे व्यक्तियों का उपचार करना पड़ा। वहीं झुलसे व्यक्तियों के परिवार वालों के साथ ही गांव के भी लोगों को सीएचसी पहुंचने और रात में भी बिजली गिरने के डर से लोग दहशत में रहे। सीएचसी पर दर्जनों ग्रामीणों का जमावड़ा और इलाज को लेकर रह-रहकर बनती तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस भी पूरी रात यहां जमा रही। सुबह जब स्थिति सामान्य हुई तब जाकर चिकित्सकों और पुलिस कर्मियों ने राहत की सांस ली।
मौतों पर नहीं दिखती संजीदगी
बभनी। बिजली गिरने के चलते जिले में महज दस साल के भीतर तीन सौ से अधिक लोग असमय जिंदगी गवां चुके हैं। स्थिति को देखते हुए प्रभावित इलाकों में व्यापक स्तर पर तड़ित चालक यंत्र स्थापित करवाए जाने की मांग कई बार उठाई गई लेकिन जनहानि से जुड़े इस मसले पर सरकारी कवायद अभी तक सिर्फ बचाव के उपायों को लेकर जागरूक करने तक ही सिमटी हुई है। 2016 में तत्कालीन एसडीएम डा. विश्राम ने इसको लेकर पहल भी की लेकिन उनके तबादले के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया।