सोनभद्र (डाला)। श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर डाला में आयोजित साहित्य-संगीत उत्सव में बुधवार की शाम दूसरे चरण में ‘शिक्षा में कला की भूमिका और समाज में विभाजित भूगोल में कला की भूमिका’ विषय पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर फाउंडेशन की तरफ से नए प्रोजेक्ट ‘उपक्रम’ की घोषणा की गई, ताकि कम्युनिटी लाइब्रेरी एवं कला के विभिन्न आयामों के माध्यम से इस क्षेत्र के अति पिछड़े समुदाय, खासकर आदिवासियों को पढ़ने-लिखने की संस्कृति से जोड़ा जा सके।
शिक्षा में कला की भूमिका विषय पर चर्चा करते हुए पद्मश्री उमाकांत गुंदेचा ने कहा कि पहले गुरुकुल परंपरा मे बच्चों को शिक्षा के साथकला के विभिन्न आयामों की शिक्षा दी जाती थी। हमारे यहां के मंदिर भी इस परंपरा का निर्वाह किया करते थे। अब ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि हमें सोचना पड़ेगा कि हम शिक्षा व्यवस्था में संस्कृति को कैसे जोड़ पायें? ‘शिक्षा से हम क्या चाहते हैं? शिक्षा का अर्थ क्या है?। इसी सवाल से पद्मश्री गीता चंद्रन ने भी आपनी बात शुरू की। उन्होंने स्कूलों में होने वाली अतिरिक्त गतिविधियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि सप्ताह में महज 2-3 घंटे की क्लास कर देने से बच्चे इन कलाओं से नहीं जुड़ पाएंगे। उन्होंने रुक्मिणी देवी और रविन्द्रनाथ टैगोर का उदाहरण देते हुए कहा कि कला क्षेत्र में या फिर शांति निकेतन में शिक्षा और कला को कभी अलग नही देखा गया। इस बात को समझना होगा और हमें इस पर अमल के लिए ठोस योजना बनानी होगी। बीएचयू के प्रोफेसर सदानन्द शाही ने ‘समाज के विभाजित भूगोल में कला की भूमिका’ विषय पर अपनी बात रखी। कहा कि ‘कला का उद्भव ही भगवान् शिव से हुआ है। नटराज की मुद्रा और डमरू की ध्वनि से नृत्य-संगीत की उत्पत्ति हुई है। शिव मंगल के द्योतक हैं और जो अशिव है नकारात्मक है कलाएं उसका क्षरण करती हैं। रामनाथ शिवेंद्र ने लियोनार्दो की एक पंक्ति ‘जो हमें दिखाई देता है, हमें उसपर यकीन नही कर लेना चाहिए, बल्कि देखे हुए को समझो.. बात शुरू करते हुए कहा कि शिक्षा हमें किसी बात को परत दर परत समझने और उसपर विचार करने के लिए प्रेरित करती है। अभिनेता सुरेंद्र राजन ने अपने जीवन अनुभव बताए। संचालन किरण ने किया। श्री अचलेश्वर महादेव मंदिर फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष महंत मुरली तिवारी ने सभी साहित्यकारों और कलाकारों को अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। चंद्रप्रकाश तिवारी, किरन तिवारी, संजय मिश्रा आदि मौजूद रहे।