दुद्धी तहसील क्षेत्र में गिरती बिजली से बचाव की पहल शुरू हो गई है। दुद्धी एसडीएम डा. विश्राम यादव की ओर से कराए गए सर्वे में 46 गांवों की स्थिति अति संवेदनशील की पाई गई है। इसमें म्योरपुर ब्लाक के बीस, बभनी के बारह और दुद्धी ब्लाक के चौदह गांव शामिल है। सभी गांवों मेें तड़ित चालक यंत्र के लिए स्थल चयन के कार्य को भी अंतिम रूप देकर गुरुवार को रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई। डीएम की मंजूरी मिलते ही इस पर कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
दुद्धी तहसील क्षेत्र (ऊर्जांचल शामिल) में 2009-10 से अब तक 91 लोगों की बिजली गिरने से मौत हो चुकी है। पिछले वर्ष 29 जून को अमर उजाला ने भौगोलिक बनावट बनी बाशिंदों के लिए अभिशाप शीर्षक से खबर भी प्रकाशित की थी। हजाड्स सेंटर नई दिल्ली के निदेशक चुन्नू राय ने माना था यहां खनिज पदार्थों की बहुलता, दुधारू पेड़ों की अधिकता, रिहंद डैम में घुलते औद्योगिक अवशिष्ट पदार्थों के चलते बढ़ती धात्विक मात्रा इसके लिए विशेष रूप से जिम्मेदार है। इस वर्ष भी बारिश की शुरुआत के साथ ही बिजली गिरने का सिलसिला शुरू हो चुका है।
पूरे जिले में जहां दस से अधिक मौत हो चुकी है। वहीं अकेले दुद्धी तहसील क्षेत्र में मौतों की संख्या पांच पहुंच चुकी है। उधर, एसडीएम दुद्धी डा. विश्राम सिंह यादव भी बिजली गिरने से होती मौतों का गंभीर मानते हैं। कहा कि दुद्धी तहसील क्षेत्र के म्योरपुर, बभनी और दुद्धी ब्लाक के 46 गांवों का चयन तड़ित चालक यंत्र के लिए किया गया है। इसके लिए स्थल चयन कर, रिपोर्ट भी डीएम को दे दी गई है।