सोनभद्र। जिले में तीन सौ करोड़ के लिए हुए मनरेगा घोटाले की जांच करने आई सीबीआई टीम वापस लखनऊ शुक्रवार को लौट गई। टीम अपने साथ घोटाले से जुड़ी कई दस्तावेज अपने साथ ले गई। सीबीआई टीम ने कई सप्लायर एवं कर्मियों को लखनऊ तलब किया है।
बसपा सरकार में जिले में वर्ष 2007 से 2010 के बीच महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत गांवों में विकास कार्य कराने के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है। सर्वाधिक घोरावल, म्योरपुर और चोपन ब्लॉक मेें मनरेगा के तहत सड़क, चेकडैम, पुलिया, बंधी, तालाब आदि कार्यों में गड़बड़ी की गई है। कई कार्यों को कागजों पर कराकर सरकारी धन का बंदरबाट किया गया है। इसका खुलासा उच्चाधिकारियों के जांच करने पर हुआ। सूत्रों की मानें तो दो दिन पूर्व मनरेगा घोटाले की जांच कर रही लखनऊ से सीबीआई टीम के अफसर आरआर त्रिपाठी, प्रवीण द्विवेदी वाराणसी पहुंचे थे। विकास विभाग द्वारा सीबीआई टीम के सदस्यों को जांच के लिए चार पहिया वाहन मुहैया कराया गया। वाराणसी में टीम ने घोरावल ब्लॉक में मनरेगा के कार्यों में सामग्री आपूर्ति करने वाले कई सप्लायरों, कर्मियों को बुलाकर पूछताछ कर उनसे जरूरी कागजातों कब्जे में लिया। इसके बाद जांच अधिकारी वापस लखनऊ चले गए। टीम ने मनरेगा घोटाले में शामिल कई कर्मियों और बिल्डिंग मैटेरियल की आपूर्ति करने वाले सप्लायरों को लखनऊ आफिस में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। इस संबंध में डीसी मनरेगा जीपी सिंह ने कहा कि सीबीआई टीम ने दो दिनों के लिए ही वाहन मुहैया कराने की बात कही थी। टीम वापस लौट गई या नहीं इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।